प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 और 14 मार्च को असम के महत्वपूर्ण दौरे पर :-
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 13 और 14 मार्च को असम के महत्वपूर्ण दौरे पर आने वाले हैं। इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान वे राज्य में लगभग ₹10,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
यह दौरा असम सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, कृषि और सामाजिक विकास को नई गति देने वाला माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के तहत कोकराझार (BTR क्षेत्र) में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं सुविधाओं के नए अवसर तैयार करना है। गुवाहाटी में प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की अगली किस्त भी जारी करेंगे। इस योजना के माध्यम से देशभर के करोड़ों किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान कार्यक्रम से जुड़ेंगे और उन्हें आर्थिक सहायता का लाभ मिलेगा।इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू चाय बागान श्रमिक परिवारों को भूमि अधिकार प्रमाण पत्र (पट्टा) वितरण भी होगा। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री स्वयं एक चाय बागान श्रमिक को पहला भूमि पट्टा प्रदान करेंगे। यह कदम चाय बागान समुदाय को सामाजिक सुरक्षा और भूमि अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। 14 मार्च को प्रधानमंत्री सिलचर में एक विशाल अवसंरचना परियोजना की आधारशिला रखेंगे। लगभग ₹22,000 करोड़ की लागत से बनने वाला सिलचर–शिलांग– गुवाहाटी एक्सप्रेसवे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे से असम और मेघालय के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री 150 मेगावाट क्षमता वाले कोपिली हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में बिजली उत्पादन को मजबूत करेगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।प्रधानमंत्री का यह दौरा असम के लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार, कृषि विकास, ऊर्जा सुरक्षा और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इससे न केवल राज्य में विकास की गति तेज होगी बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ा जा सकेगा।