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देश के कई राज्यों सहित उत्तर प्रदेश में कॉमर्शियल गैस सिलेणरडर सप्लाई बन्द :

केन्द्र सरकार ने देशभर में 'एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955' लागू कर दिया है। हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है। गैस किल्लत को देखते हुए दिल्ली मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस रोक की वजह से रेस्टोरेंट्स और होटलों के बन्द होने की नौबत आ गई है। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वालों ने सरकार से कहा है कि सप्लाई बहाल की जायें। वहीं कमोडिटी एक्ट लागू होने के बाद 4 कैटेगरी में गैस बंटेगी, जो निम्न हैं:-
👉 पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई) :-
इसमें आपके घर की रसोई गैस (पीएनजी) और गाड़ियों में डलने वाली सीएनजी आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी।
👉 दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने) :-
खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जायेगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है।
👉 तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग) :-
नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी।
👉चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल) :-
शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेन्ट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जायेगी।
👉आपको बता दें कि एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 का एक ऐसा कानून है, जो सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां या ईंधन की सप्लाई और कीमतों को कन्ट्रोल कर सकें। इसे आसान भाषा में 'जमाखोरी रोकने वाला कानून' कह सकते हैं।
👉 कभी किसी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर देती है। इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक लिमिट तय कर दी जाती है कि वे एक सीमा से ज्यादा सामान गोदामों में नहीं भर सकते।
👉अन्य राज्यों सहित उत्तर प्रदेश में सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर :-
तमाम अन्य राज्यों सहित उत्तर प्रदेश में कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर अघोषित रोक से होटल-रेस्टोरेन्ट और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कम्पनियों ने एजेंसियों को पूरा फोकस सिर्फ घरेलू गैस पर रखने को कहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोगों में घबराहट का माहौल है। लखनऊ, कानपुर और वाराणसी, गोरखपुर एवं सिद्धार्थनगर जैसे शहरों में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो पा रही है।
👉वहीं संकट से निपटने भारत सरकार ने 4 जरूरी कदम उठायें हैं :-
1. हाई-लेवल कमेटी बनाई :-
संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने 03 तेल कम्पनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।
2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू :-
गैस की सप्लाई को कन्ट्रोल करने के लिए केन्द्र सरकार ने देशभर में 'एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955' लागू कर दिया है।
3. 21 दिन बाद होगी एलपीजी बुकिंग :-
घरेलू सिलेण्डर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेण्डर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेण्डर 21 दिन बाद ही बुक होगा।
4. ओटीपी और बायोमेट्रिक अनिवार्य :-
गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेन्ट ओटीपी या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं।
5. एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश :-
सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कम्पनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। इस एक्स्ट्रा उत्पादन का इस्तेमाल घरेलू रसोई गैस के लिए होगा।
👉 सप्लाई संकट की 2 वजह जो निम्न हैं -
1. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का लगभग बन्द होना :-
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बन्द होना है। ये करीब 167 किमी लम्बा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
2. प्लान्ट पर ड्रोन हमले से एलएनजी का प्रोडक्शन रुका:
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी प्लान्ट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% एलएनजी (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।
आपको बता दें कि इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबन्धक (एलपीजी) के एम0 ठाकुर ने बताया कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है। वहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भण्डार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सकें। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है। वहीं पांच दिन पहले सरकार ने घरेलू गैस सिलेण्डर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की एलपीजी गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। जबकि 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेण्डर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। वहीं सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़़ में 19 किग्रा वाले कमर्शियल सिलेण्डर 1953.50 रुपए में था जो 115 रुपये में बढ़कर अब 2068.50 रुपए है। वहीं बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं। इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेण्डर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। यानी ये बढ़ोतरी करीब एक साल बाद की गई है। वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेण्डर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाये गये थे। भारत सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस की किल्लत की आशंका जताई गई है।

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