विकसित भारत की राह में 'भ्रष्टाचार' सबसे बड़ी बाधा: राष्ट्र निर्माण के लिए सुचिता अनिवार्य
कानपुर। आज भारत विश्व पटल पर एक महाशक्ति (World Power) के रूप में उभर चुका है। आर्थिक सुधारों, तकनीकी नवाचार और कूटनीतिक कौशल के दम पर हम तेजी से 'विकसित राष्ट्र' बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। लेकिन, इस गौरवशाली यात्रा के बीच भ्रष्टाचार एक ऐसी मुख्य रुकावट बनकर खड़ा है, जो विकास की गति को बाधित कर रहा है।
मुख्य बिंदु:
संसाधनों का रिसाव: जहाँ एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे और जन कल्याण पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं भ्रष्टाचार के कारण इन संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा जमीन तक पहुँचने से पहले ही सिस्टम की भेंट चढ़ जाता है।
नैतिकता का संकट: एक विकसित देश केवल ऊँची इमारतों और अर्थव्यवस्था से नहीं बनता, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और नागरिक अनुशासन से बनता है। भ्रष्टाचार समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर करता है।
कानपुर की भूमिका: औद्योगिक नगरी कानपुर के नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यदि हमें 'सशक्त भारत' का सपना पूरा करना है, तो प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनानी होगी।
निष्कर्ष:
भारत की क्षमता पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन भ्रष्टाचार रूपी इस अवरोध को हटाए बिना हम पूर्ण विकास का स्वाद नहीं चख सकते। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह एक पारदर्शी और ईमानदार व्यवस्था के निर्माण में अपना योगदान दे। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक विकसित भारत का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।