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टापू जिहाद?

कुछ वर्ष पहले मोदी जी ने समंदर में डुबकी लगाई थी ।

आखिर क्यों मोदी को समंदर में डुबकी लगाकर द्वारका जी के दर्शन करने जाना पड़ा....?

गुजरात हाईकोर्ट ने भेंट द्वारका (Beyt Dwarka) के 2 द्वीपों पर कब्जा जमाने के सुन्नी वक्फ बोर्ड के सपने को चकनाचूर कर दिया है ।
इस समय गुजरात का यह विषय बहुत चर्चा में है । सोशल मीडिया के माध्यम से हम लोगों को मालूम पड़ गया, वरना पता ही नहीं चलता ।

कैसे पलायन होता है और कैसे कब्जा होता है ? लैंड जिहाद क्या होता है ? यह समझने के लिए आप बस भेंट द्वारका टापू का अध्ययन कर लें तो सब प्रक्रिया समझ आ जायेगी ।

कुछ साल पहले तक यहाँ की लगभग पूरी आबादी हिन्दू थी ।
यह ओखा नगरपालिका के अन्तर्गत आने वाला क्षेत्र है, जहाँ जाने का एकमात्र रास्ता पानी से होकर जाता है । इसलिए भेंट द्वारका से बाहर जाने के लिए लोग नाव का प्रयोग करते हैं ।

यहाँ द्वारकाधीश का प्राचीन मंदिर स्थित है । कहते हैं कि 5 हजार साल से अधिक समय पहले श्रीकृष्ण जी के अभिन्न मित्र सुदामा जब भगवान श्रीकृष्ण से भेंट करने द्वारका आए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण जी ने दो मुट्ठी तांदुल (चावल) के बदले अपने मित्र सुदामा को एक आलीशान महल इस द्वीप पर बनवाकर भेंट किया था, जिसके कारण इस द्वीप का नाम भेंट द्वारका पड़ा । इसके पश्चात यहाँ रुक्मिणी ने द्वारकाधीश जी की मूर्ति की स्थापना की थी ।

समुद्र से घिरा यह टापू बड़ा शांत रहता था । लोगों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना था । धीरे-धीरे यहाँ बाहर से मछली पकड़ने वाले मुस्लिम आने लगे ।

दयालु हिन्दू आबादी ने इन्हें वहाँ रहकर मछली पकड़ने की अनुमति दे दी । धीरे-धीरे मछली पकड़ने के पूरे कारोबार पर मुस्लिमों का कब्जा हो गया ।

बाहर से फंडिंग के चलते इन्होंने बाजार में सस्ती मछली बेचना प्रारंभ किया, जिससे सब हिन्दू मछुआरे बेरोजगार हो गये। अब हिन्दू आबादी ने रोजगार के लिए टापू से बाहर जाना शुरू किया ।

लेकिन यहां एक और प्रयोग हुआ,भेंट द्वारका से मात्र दो किलोमीटर दूर ओखा तक जाने के लिए नाव में 8 रुपये किराया लगता था ।

अब क्योंकि सब नावों पर मुस्लिमों का कब्जा हो गया था तो उन्होंने किराये का नया नियम बनाया। जो हिन्दू नाव से ओखा जाएगा, वह किराये के 100 रुपये देगा और मुस्लिम वहीं 8 रुपये देगा ।

अब कोई दिहाड़ी हिन्दू केवल आवाजाही के 200 रुपये देगा तो वह बचायेगा क्या ? इसलिए रोजगार के लिए हिन्दुओं ने वहाँ से पलायन शुरू कर दिया ।
अब वहाँ केवल 15 प्रतिशत हिन्दू आबादी रहती है ।

आपने पलायन का पहला कारण यहाँ पढ़ा ।

रोजगार के 2 मुख्य साधन मछली पकड़ने का काम और ट्रांसपोर्ट दोनों हिन्दुओं से छीन लिए गए । बाकी सब जगह की तरह राज मिस्त्री, कारपेंटर, इलेक्ट्रॉनिक मिस्त्री, ड्राइवर, नाई व अन्य हाथ के काम भी 90% तक हिन्दुओं से हस्तगत कर लिये हैं ।

अब भेंट द्वारका में तो 5 हजार साल पुराना मंदिर है, जिसके दर्शन के लिए हिन्दू जाते थे तो इसमें वहां के जिहादियों ने नया तरीका निकाला ।

क्योंकि *आवाजाही के साधनों पर उनका कब्जा हो चुका था* तो उन्होंने आने वाले श्रद्धालुओं से केवल 20-30 मिनट की जलयात्रा के 4 हजार से 5 हजार रुपये मांगने शुरू कर दिये ।

इतना महंगा किराया आम व्यक्ति कैसे चुका पायेगा, इसलिए लोगों ने वहां जाना बंद कर दिया ।

अब जब वहाँ पूर्ण रूप से जिहादियों की पकड़ हो गई तो उन्होंने जगह-जगह मकान बनाने शुरू किये, देखते ही देखते प्राचीन मंदिर को चारों तरफ से *मजारों* से घेर दिया गया । गुजरात सरकार को इस लैंड जिहाद का पता ही नहीं था ।

वहाँ की बची-खुची हिन्दू आबादी सरकार को अपनी बात कहते-कहते हार चुकी थी, फिर कुछ हिन्दू समाजसेवियों ने इसका संज्ञान लिया और सरकार को चेताया ।

सरकार ने ओखा से भेंट द्वारका तक सिग्नेचर ब्रिज बनाने का काम शुरू करवाया । बाकी विषयों की जांच शुरू हुई तो जांच एजेंसी चौंक गई ।

*गुजरात में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका स्थित भेंट द्वारका के दो टापू पर अपना दावा ठोंका है।*

वक्फ बोर्ड ने अपने आवेदन में दावा किया है कि भेंट द्वारका टापू पर दो द्वीपों का स्वामित्व वक्फ बोर्ड का है।

गुजरात उच्च न्यायालय ने इस पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि कृष्ण नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं ? और इसके बाद गुजरात उच्च न्यायालय ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया।

भेंट द्वारका में करीब आठ टापू हैं, जिनमें से दो पर भगवान कृष्ण के मंदिर बने हुए हैं। प्राचीन कहानियाँ बताती हैं कि भगवान कृष्ण की आराधना करते हुए मीरा यहीं पर उनकी मूर्ति में समा गई थीं ।

भेंट द्वारका के इन दो टापूओं पर करीब 7000 परिवार रहते हैं, इनमें से करीब 6000 परिवार मुस्लिम हैं।
यह द्वारका के तट पर लगभग ४० कि.मी. दूर एक छोटा सा द्वीप है और ओखा से कुछ ही दूरी पर स्थित है ।

वक्फ बोर्ड इसी के आधार पर इन दो टापू पर अपना दावा जताता है । यहां अभी इस साजिश का शुरुआती चरण ही था कि इसका खुलासा हो गया ।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इस चरण में कुछ लोग ऐसी जमीनों पर कब्जा करके अवैध निर्माण बना रहे थे, जो रणनीतिक रूप से भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता था ।

अब जाकर सब अवैध कब्जे व मजारें तोड़ी जा रही हैं ।
अब भव्य सी लिंक सुदर्शन सेतु का उद्घाटन हो गया है, जिससे मुसलमानों के नौका/छोटे पानी के जहाज से यात्रा करवाने का धंधा भी चौपट हो गया है । समुद्र तट पर ऐसी सैकड़ों नौकाएं बेकार खड़ी पड़ी हैं ।

बेट द्वारका में आने वाला कोई भी मुसलमान वहाँ का स्थानीय नहीं है, सब बाहर के हैं ।

फिर भी उन्होंने धीरे-धीरे कुछ ही वर्षों में वहां के हिन्दुओं से सब कुछ छीन लिया और भारत के गुजरात जैसे एक राज्य का टापू *सीरिया* बन गया ।

सावधान व सजग रहना अत्यंत आवश्यक है ।।
जागो हिन्दू जागो... 🙏🕉️

जय द्वारकाधीश 🙏🚩🚩

(एक वर्ष पुरानी पोस्ट)
पोस्ट साभार फोटो सोर्स इंटरनेट

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