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सरकार ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आयी बाधाओं को देखते हुए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लगा दिया है।

दिल्ली: सरकार ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आयी बाधाओं को देखते हुए देश में रसोई गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लगा दिया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के अनुसार, घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की आपूर्ति, परिवहन के लिए सीएनजी की आपूर्ति, एलपीजी उत्पादन, और पाइपलाइन कॉम्प्रेशर फ्यूल तथा अन्य अनिवार्य पाइपलाइन परिचालन जरूरतों को प्राथमिकता सेक्टर-1 में रखा गया है। इन उपभोक्ताओं को पिछले छह महीने की औसत के बराबर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी। वहीं अन्य क्षेत्रों के लिए आपूर्ति में कटौती की जायेगी।

इस संबंध में जारी गजट अधिसूचना में कहा गया है कि "पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष" के मद्देनजर "वितरण में समानता और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से" यह आदेश जारी किया गया है।

उर्वरक संयंत्रों को प्राथमिकता सेक्टर-2 में रखा गया है। उन्हें पिछले छह महीने की औसत के 70 प्रतिशत तक आपूर्ति की जायेगी। साथ ही यह पाबंदी होगी कि वे इसका इस्तेमाल किसी और उद्देश्य के लिए नहीं कर सकेंगे।

प्राथमिकता सेक्टर-3 में चाय उद्योग, विनिर्माण संयंत्रों तथा अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। वे पिछले छह महीने की औसत के 80 प्रतिशत तक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सिटी गैस वितरकों को दी गयी है।

पेट्रो रसायन संयंत्रों और विद्युत संयंत्रों को भी गैस की आपूर्ति में पूरी तरह या आंशिक तौर पर कटौती की जायेगी।

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