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*शीतला अष्टमी पर मंदिरों में लगेगा ठंडे पकवानों का भोग*

मंगलवार को ‘रांधा पुआ’ के अवसर पर महिलाओं ने दिनभर पकवान बनाने की तैयारियां कीं। शीतला माता के भोग के लिए कांजी बड़ा, मोहनथाल, गुंजिया, पेठे, सकरपारे, पूड़ी, पापड़ी, हलुआ, राबड़ी और घाट सहित कई प्रकार के व्यंजन बनाए गए।

रांधा पुआ के दिन भोग और पूजन सामग्री की खरीदारी को लेकर शहर के बाजारों में सुबह से ही रौनक रही। जगह-जगह फुटपाथों पर मटके, कलश और सराई की दुकानें सजी नजर आईं। परंपरा के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन अधिकांश घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और लोग ठंडा भोजन ही ग्रहण करते हैं। कई लोग ठंडे पानी से स्नान करते हैं और चाय-कॉफी भी नहीं पीते। महिलाएं तड़के गीत गाते हुए शीतला माता के मंदिरों में भोग लगाकर पत्थवारी पूजन करेंगी। मान्यता है कि माता की पूजा और शीतल भोजन करने से शीतला जनित रोगों का प्रकोप कम होता है।

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