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उत्तराखंड बजट 2026–27: ‘SANTULAN’ मॉडल पर आधारित संतुलित बजट पेश, हर वर्ग के विकास पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संतुलन के आठ मंत्रों—समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, नई सोच और न्यायपूर्ण व्यवस्था के साथ रखा बजट

भराड़ीसैंण (गैरसैंण) | 09 मार्च 2026। केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’
उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में वित्त मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वर्ष 2026–27 का बजट पेश किया। इस बजट में सरकार ने ‘संतुलन (SANTULAN)’ को मूल आधार बनाते हुए विकास की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की है।

सरकार ने इस मॉडल के माध्यम से राज्य के समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार, ग्रामीण–शहरी संतुलन और न्यायपूर्ण व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही है। ‘SANTULAN’ शब्द के प्रत्येक अक्षर में विकास और प्रगति का एक अलग आयाम शामिल किया गया है।

संतुलन (SANTULAN) मॉडल की अवधारणा

सरकार ने बजट को आठ प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया है—

S – समावेशी विकास (Inclusive Development)
A – आत्मनिर्भर उत्तराखंड (Self-Reliant Uttarakhand)
N – नई सोच (New Thinking)
T – तीव्र विकास (Rapid Development)
U – उन्नत गांव और शहर (Advanced Villages & Cities)
L – लोक सहभागिता (Public Participation)
A – आर्थिक शक्ति (Economic Strength)
N – न्यायपूर्ण व्यवस्था (Just Governance)

इन आठ मूल मंत्रों के आधार पर विभिन्न योजनाओं और क्षेत्रों के लिए बजट का प्रावधान किया गया है।

समावेशी विकास के लिए बजट प्रावधान

समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई योजनाओं के लिए बजट निर्धारित किया है।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं – ₹1327.73 करोड़
अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना – ₹600 करोड़
सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 – ₹598.33 करोड़
प्रधानमंत्री पोषण मिशन – ₹149.45 करोड़
मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना – ₹30 करोड़
मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना – ₹15 करोड़
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में कदम

कृषि, बागवानी, उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

मिशन एप्पल – ₹42 करोड़
ट्राउट मछली प्रोत्साहन योजना – ₹39.90 करोड़
उच्च मूल्य फलों (कीवी, ड्रेगन फ्रूट) के उत्पादन – ₹30.70 करोड़
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना – ₹60 करोड़
एमएसएमई सहायता योजना – ₹75 करोड़
स्टार्टअप वेंचर फंड – ₹25 करोड़
नई सोच और तकनीकी विकास

राज्य में शिक्षा, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलें की गई हैं।

संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान – ₹28 करोड़
राज्य डेटा सेंटर सुदृढ़ीकरण – ₹65 करोड़
सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना – ₹47.50 करोड़
ई-ग्रंथालय स्थापना – ₹7 करोड़
लैब ऑन व्हील्स योजना – ₹4 करोड़
तीव्र विकास के लिए आधारभूत ढांचा

सड़क और आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना – ₹1050 करोड़
गड्ढा मुक्त सड़क अभियान – ₹400 करोड़
नागरिक उड्डयन विभाग – ₹52.50 करोड़
नंदा देवी राजजात यात्रा – ₹25 करोड़
गांव और शहरों का संतुलित विकास

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए भी बड़े बजट का प्रावधान किया गया है।

ग्रामीण विकास विभाग – ₹1642.20 करोड़
शहरी निकायों के लिए – ₹1814 करोड़
पंचायती राज संस्थाएं – ₹1491 करोड़
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम – ₹40 करोड़
आर्थिक शक्ति और निवेश को बढ़ावा

राज्य में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं शामिल की गई हैं।

रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड यूटिलिटी शिफ्टिंग – ₹350 करोड़
टिहरी रिंग रोड परियोजना – ₹10 करोड़
इको टूरिज्म गतिविधियां – ₹18.50 करोड़
न्यायपूर्ण व्यवस्था और सुरक्षा

कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए भी बजट में प्रावधान किए गए हैं।

पुलिस आवास – ₹100 करोड़
स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स – ₹10 करोड़
जेल निर्माण – ₹25 करोड़
फास्ट ट्रैक कोर्ट (रेप एवं पॉक्सो मामले) – ₹3.42 करोड़

इस प्रकार राज्य सरकार ने ‘संतुलन (SANTULAN)’ मॉडल के माध्यम से विकास के विभिन्न आयामों को जोड़ते हुए समावेशी और संतुलित बजट प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

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