बहन सुभाषिनी जी की 23वीं पुण्यतिथि पर संगोष्ठी का आयोजन
खानपुर कलां-10 मार्च। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में पद्मश्री बहन सुभाषिनी जी की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सुभाषिनी देवी शोध पीठ द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय — “अशिक्षा के कोहरे से महिला शिक्षा के सवेरे तक : सुभाषिनी देवी एक मशालवाहक”। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि प्रो. रवि भूषण, प्रो. सुषमा जोशी और डॉ. सुमन दलाल ने वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए।बहन सुभाषिनी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर हवन में आहुति डालते हुए उनकी पुत्री बहन कमला रानी व कुलपति प्रो सुदेश ने उनकी समाधि स्थल पर पुष्पार्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में कुलपति प्रो. सुदेश ने कहा कि पद्मश्री बहन सुभाषिनी जी ने अपने पिता महान समाज सुधारक भगत फूल सिंह जी के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए नारी शिक्षा की ज्योति को निरंतर प्रज्वलित रखा। उन्होंने कहा कि जिस समय समाज में महिलाओं की शिक्षा को लेकर अनेक सामाजिक बंधन और रूढ़ियां थी, उस समय बहन सुभाषिनी जी ने साहस, समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ महिला शिक्षा को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि आज भक्त फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय उनके सपनों और संकल्पों का साकार रूप है, जो महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. रवि भूषण ने कहा कि सुभाषिनी देवी का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अशिक्षा के अंधकार को दूर कर शिक्षा का प्रकाश फैलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।प्रो. सुषमा जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि महिला शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि समाज में समानता, जागरूकता और सशक्तिकरण का आधार भी है। उन्होंने कहा कि सुभाषिनी देवी ने शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, जिसके परिणामस्वरूप समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव हुआ।वहीं डॉ. सुमन दलाल ने कहा कि सुभाषिनी देवी का जीवन और उनके कार्य हमें यह संदेश देते हैं कि शिक्षा ही समाज के समग्र विकास का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा प्रज्वलित महिला शिक्षा की मशाल आज भी नई पीढ़ी को आगे बढ़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित कर रही है।इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में सुभाषिनी देवी शोध पीठ की निदेशक प्रो डेज़ी नेहरा , प्रो शकुंतला , बहन साहबकौर , शोधार्थियों और छात्राओं ने उनके जीवन से प्रेरणा लेने और महिला शिक्षा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।फोटो कैप्शन :- 01 पद्मश्री सुभाषिनी देवी के समाधि स्थल पर पुष्पार्पित करते कुलपति प्रो सुदेश व बहन कमला रानी। 02 संगोष्ठी को सम्बोधित करते कुलपति प्रो सुदेश।