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जनपद उन्नाव: जब कलम पर ही हमला हो जाए तो न्याय की आवाज कौन उठाएगा?” उन्नाव में पत्रकार के साथ मारपीट, FIR के लिए करना पड़ा प्रदर्शन

उन्नाव पत्रकार वह होता है जो दूसरों के हक और न्याय की लड़ाई अपनी कलम से लड़ता है। लेकिन अगर वही पत्रकार सच लिखने की कीमत मारपीट और दबाव के रूप में चुकाने लगे, और ऊपर से प्रशासन भी उसकी सुनवाई न करे, तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कितना सुरक्षित है।

ताजा मामला उन्नाव के अजगैन कोतवाली क्षेत्र से सामने आया है। यहां निष्पक्ष न्यूज के पत्रकार रवि राजपूत को एक खबर चलाना भारी पड़ गया। आरोप है कि खबर से नाराज दबंगों ने पत्रकार के साथ मारपीट और अभद्रता की।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि जब पीड़ित पत्रकार ने पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई तो सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर मंगलवार को पत्रकार रवि राजपूत अपने साथी पत्रकारों के साथ अजगैन कोतवाली गेट पर धरने पर बैठ गए और आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करना पड़ा।

बताया जाता है कि जब तक यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुआ और पत्रकारों ने उन्नाव पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल पर ट्वीट कर जवाब नहीं मांगा, तब तक पुलिस हरकत में नहीं आई। बाद में पुलिस की ओर से क्षेत्राधिकारी हसनगंज को जांच और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात कही गई।

गौरतलब है कि उन्नाव में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई पत्रकार खबर चलाने के कारण दबंगों के निशाने पर आ चुके हैं। कई बार तो हालात ऐसे बने कि उल्टा पत्रकारों के खिलाफ ही FIR दर्ज कराने की कोशिश की गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
अगर सच लिखने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं होंगे, अगर उनकी शिकायत सुनने के लिए भी उन्हें सड़क पर उतरना पड़ेगा, तो फिर आम जनता की आवाज कौन बनेगा?

क्योंकि जब कलम को डराने की कोशिश होती है, तो केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज कमजोर होती है। 🖊️📰

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