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असम की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (𝐍𝐃𝐀) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है।

असम गण परिषद (𝐀𝐆𝐏) के अध्यक्ष और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री अतुल बोरा ने सोमवार को संकेत दिया कि भारतीय जनता पार्टी (𝐁𝐉𝐏) के साथ सीट-शेयरिंग को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी चुनावों से पहले गठबंधन के भीतर कुछ मतभेद उभर रहे हैं। अतुल बोरा ने यह टिप्पणी गुवाहाटी में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान की। इस कार्यक्रम में सोनाई विधानसभा क्षेत्र के विधायक करीम उद्दीन बरभुइया, जो पहले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (𝐀𝐈𝐔𝐃𝐅) के उपाध्यक्ष रह चुके हैं, औपचारिक रूप से पार्टी के साथ जुड़े। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बोरा ने सीट बंटवारे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट संकेत दिया कि बातचीत अभी जारी है। उन्होंने कहा कि “बीजेपी के साथ सीट-शेयरिंग का मुद्दा अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुआ है। हमने कुछ ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों की मांग की है जहां वर्तमान में बीजेपी के विधायक हैं, वहीं बीजेपी ने भी कुछ ऐसे क्षेत्रों पर दावा किया है जहां हम खुद को जीतने की स्थिति में मानते हैं।” हालांकि, उन्होंने गठबंधन में किसी बड़े विवाद या दरार की बात को कमतर बताते हुए कहा कि सहयोगी दलों के बीच बातचीत के दौरान मतभेद होना स्वाभाविक है। बोरा ने कहा कि “जहां दोस्ती होती है, वहां थोड़ी बहुत कड़वाहट भी होती है। अगर कोई सीटों की संख्या को लेकर कुछ कह रहा है तो हम उस पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करेंगे। हमारी अपनी कार्यशैली है और हम उसी के अनुसार आगे बढ़ते हैं।” पत्रकारों ने जब वरिष्ठ एजीपी नेता रामेंद्र नारायण कलिता की संभावित उम्मीदवारी को लेकर सवाल पूछा, तो बोरा ने कुछ तीखे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “आप पत्रकारों से सीटों पर चर्चा करने का क्या फायदा? हम उनके बारे में पत्रकारों से ज्यादा सोचते हैं।” इस बीच, यह बयान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के पहले दिए गए दावों से अलग नजर आता है। मुख्यमंत्री ने इससे पहले कहा था कि एनडीए के भीतर सीट-बंटवारे को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है और अंतिम स्वीकृति केवल पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मिलनी बाकी है। 5 मार्च को मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि
“पिछली रात हमने असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (𝐁𝐏𝐅) और राभा हासोंग जौथा मंच के साथ बातचीत पूरी कर ली है। एनडीए के भीतर सीट-शेयरिंग पर हमारी चर्चा अब पूरी हो चुकी है।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि सहयोगी दलों को कितनी सीटें दी जाएंगी। लेकिन उन्होंने संकेत दिया था कि एजीपी को लगभग उतनी ही सीटें मिल सकती हैं जितनी पिछली बार मिली थीं, संभव है कि एक-दो सीटों का मामूली अंतर हो।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि “एजीपी के साथ हमारी समझ अच्छी रही है और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ भी समन्वय में कोई समस्या नहीं है।” फिलहाल एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा के ताजा बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि सीट-बंटवारे को लेकर बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए बीजेपी, एजीपी और अन्य एनडीए सहयोगी दलों के बीच अंतिम फार्मूला तय होना अभी बाकी है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता सामने आ सकती है। असम की राजनीति में एनडीए गठबंधन लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है, इसलिए सीट-शेयरिंग को लेकर होने वाली हर बातचीत को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि गठबंधन के भीतर सीटों का अंतिम बंटवारा किस तरह तय होता है और इसका आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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