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पावर हाउस की सुरक्षा से खिलवाड़: निजी भूमि का सहारा लेकर बफर जोन के नियमों की सरेआम धज्जियाँ!

​विकासनगर (देहरादून): ढकरानी पावर हाउस की बाउंड्री वॉल से सटे खेतों में चल रहे रेत भंडारण के खेल में अब एक नया पैंतरा सामने आया है। नियमों की आड़ लेने के लिए 'निजी कृषि भूमि' और 'जमीन मालिक से किरायेनामे' का हवाला देकर अवैध भंडारण को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी की निजी जमीन होने मात्र से देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं की सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है?
​केंद्र सरकार के 'Enforcement & Monitoring Guidelines 2020' के अनुसार, सुरक्षा घेरा या 'बफर जोन' का नियम भूमि के मालिकाना हक पर नहीं, बल्कि 'स्ट्रक्चरल सेफ्टी' (संरचनात्मक सुरक्षा) पर आधारित होता है।

गाइडलाइन के पेज 22 पर स्पष्ट उल्लेख है कि पावर हाउस और वॉटर इंटेक जैसी संवेदनशील जगहों के 250 से 500 मीटर के दायरे में कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं हो सकती जो ढांचे को नुकसान पहुँचाए। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किस कानून के तहत कृषि भूमि पर औद्योगिक स्तर का रेत भंडारण करने की अनुमति दी गई, वो भी एक अति-संवेदनशील पावर हाउस की दीवार के ठीक बगल में?
​यहाँ जवाबदेही सीधे तौर पर जिला खनन विभाग और राजस्व विभाग की बनती है। क्या इन विभागों ने अनुमति देने से पहले मौके का मुआयना किया? क्या उन्होंने यह देखा कि यह कृषि भूमि पावर हाउस से महज चंद कदमों की दूरी पर है? यदि यह भंडारण बिना अनुमति के 'निजी भूमि' के नाम पर चलाया जा रहा है, तो यह शासन की आँखों में धूल झोंकने जैसा है।

निजी जमीन का मालिक होना किसी को भी यह अधिकार नहीं देता कि वह राष्ट्रीय संपत्ति (पावर हाउस) के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करे।

​इस पूरे प्रकरण में यूजेवीएनएल (UJVNL) प्रबंधन की चुप्पी सबसे ज्यादा संदेहास्पद है। अपनी बाउंड्री वॉल से चंद मीटर दूर हो रहे इस अतिक्रमण और उससे उड़ने वाली घातक धूल पर अधिकारी आँखें मूंदे क्यों बैठे हैं? डंपरों की आवाजाही से न केवल कृषि भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही है, बल्कि पावर हाउस के भीतर लगे करोड़ों के उपकरणों पर 'शॉर्ट सर्किट' का खतरा मंडरा रहा है। शासन को तुरंत हस्तक्षेप कर यह जांचनी चाहिए कि इस 'किरायेनामे' के पीछे असली खिलाड़ी कौन हैं और किन अधिकारियों के संरक्षण में बफर जोन के नियमों की बलि दी जा रही है। जवाबदेही तय होनी ही चाहिए—चाहे वह अनुमति देने वाला विभाग हो या नियमों की अनदेखी करने वाला प्रबंधन।

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