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तेज गर्मी शुरू होते ही बीसलपुऱ बांध से आई बड़ी खबर, रोज घट रहा 45 MCM पानी, PHED ने की ये तैयारी

तेज गर्मी की शुरुआत के साथ ही राजस्थान के बीसलपुर बांध का जलस्तर तेजी से घटने लगा है। वर्तमान में जलापूर्ति, वाष्पीकरण और सिंचाई के कारण रोजाना करीब 45 एमसीएफटी पानी कम हो रहा है।

Public Health Engineering Department:गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही पेयजल की मांग भी बढ़ने लगी है। बढ़ती मांग को देखते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) ने बीसलपुर बांध से शहरों और गांवों में जलापूर्ति बढ़ाने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं दूसरी ओर तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण में भी तेजी आने लगी है, जिससे बांध के जलस्तर में रोजाना गिरावट बढ़ने लगी है।

बांध परियोजना के अनुसार पहले जलापूर्ति, वाष्पीकरण और नहरों से सिंचाई के लिए छोड़े जा रहे पानी के बाद प्रतिदिन 43 से 44 एमसीएफटी पानी घट रहा था, जो अब बढ़कर करीब 45 एमसीएफटी प्रतिदिन हो गया है। तापमान में और बढ़ोतरी होने तथा पेयजल के लिए पानी की मात्रा बढ़ने पर यह कमी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
बारिश से 22 दिन के पानी की बचत
बीसलपुर बांध परियोजना के अभियंताओं के अनुसार 10 दिसंबर को नहरों से जलापूर्ति शुरू करते समय बांध का गेज पूर्ण जलभराव 315.50 आरएल मीटर था। शुक्रवार को यह घटकर 314.87 आरएल मीटर रह गया। इस तरह पिछले 85 दिनों में बांध के जलस्तर में कुल 63 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है।

पहले नहरों से सिंचाई के दौरान जलस्तर प्रतिदिन लगभग एक सेंटीमीटर घटता था, लेकिन इस बार लंबे समय तक हुई बारिश और बीच-बीच में नहरों का पानी कम करने से करीब 22 सेंटीमीटर पानी की बचत हुई है। यह बचा हुआ पानी जयपुर, अजमेर और टोंक जिलों की लगभग एक माह तक प्यास बुझाने में सहायक होगा।
वर्तमान जलापूर्ति की स्थिति
सूरजपुरा फिल्टर प्लांट के अधिशासी अभियंता दिनेश शर्मा के अनुसार वर्तमान में बीसलपुर बांध से जयपुर और उससे जुड़े क्षेत्रों को प्रतिदिन 575 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। अजमेर जलापूर्ति योजना के तहत 330 एमएलडी पानी दिया जा रहा है, जिसमें अजमेर शहर के साथ ब्यावर, किशनगढ़, पुष्कर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। वहीं बीसलपुर-टोंक-उनियारा पेयजल परियोजना के तहत टोंक जिले को वर्तमान में 68 एमएलडी पानी दिया जा रहा है।

पीएचईडी अभियंताओं के अनुसार गर्मी में पानी की मांग बढ़ने पर जल्द ही जयपुर जलापूर्ति में 25 एमएलडी की बढ़ोतरी कर इसे 600 एमएलडी तक किया जा सकता है। इसी तरह अजमेर जलापूर्ति को 15 से 20 एमएलडी बढ़ाकर लगभग 350 एमएलडी तथा बीसलपुर-टोंक-उनियारा परियोजना के तहत जलापूर्ति को बढ़ाकर 70 एमएलडी किया जा सकता है।

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