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राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को बेनकाब करती पुस्तक “हिंदुस्तान की रामलीला” — डॉ. गंगाधर पटेल।

राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को बेनकाब करती पुस्तक “हिंदुस्तान की रामलीला” — डॉ. गंगाधर पटेल
बिलासपुर! संवाददाता नवल वर्मा!साहित्यिक संस्था “कविता चौपाटी से” के तत्वावधान में होली मिलन एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन रुद्राक्ष कुटीर ढेका समीप पेपर मिल मस्तूरी रोड में किया गया। इस अवसर पर साहित्यकार श्री राजेंद्र मौर्य द्वारा रचित चर्चित पुस्तक “हिंदुस्तान की रामलीला” की समीक्षात्मक चर्चा आयोजित की गई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार श्री द्वारिका वैष्णव एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. गंगाधर पटेल ने पुस्तक की गहन समीक्षा प्रस्तुत की। श्री द्वारिका वैष्णव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में घटित अनेक ज्वलंत घटनाओं और विसंगतियों पर कटाक्ष करने का साहस लेखक राजेंद्र मौर्य ने दिखाया है, जिन विषयों से सामान्यतः कई रचनाकार दूरी बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य की पहचान यह है कि वह हास्य से आरंभ होकर व्यंग्य के माध्यम से समाज को कुरेदता हुआ अंततः करुणा के भाव तक पहुंचता है—और यह गुण इस कृति में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
वहीं वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. गंगाधर पटेल ने कहा कि राजेंद्र मौर्य की भाषा कटुमारक होने के साथ-साथ अत्यंत बोधगम्य है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से राजनीति और समाज के जटिल ताने-बाने का बेबाक और सशक्त चित्रण किया है, जो पाठकों को सोचने के लिए विवश करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री केवल कृष्ण पाठक ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि अपनी पुस्तक की समीक्षा सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना हर साहित्यकार के बस की बात नहीं होती। यह लेखक के आत्मविश्वास और ईमानदारी का परिचायक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लेखक ने जो भी लिखा है, वह पूरी निष्ठा और सत्यनिष्ठा के साथ लिखा है।
समारोह के प्रारंभ में एक भावपूर्ण काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें श्रीमती आरती राय ने महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर तीखा स्वर उठाते हुए कहा—
“अब ना हमें तुम्हारी ‘पत्नी’ जैसे संबोधन की खैरात चाहिए।”
वहीं श्री राकेश अयोध्या ने श्रृंगार रस से ओतप्रोत अपनी कविता “प्रेम अब न पत्थरों से करो, स्वयं में आत्मविश्वास भरो” का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
काव्य गोष्ठी में अन्य कवियों में श्री अशरफीलाल सोनी, श्रीमती लेखनी यादव, श्री भारत मस्तुरिया, श्री दुर्गा प्रसाद मेरसा, श्रीमती जलेश्वरी वस्त्रकर, श्रीमती धनेश्वरी सोनी, श्री दिनेश राव जाधव तथा श्री मेहतरू मधुकर ने भी अपनी-अपनी रचनाओं का प्रभावशाली काव्य पाठ कर वातावरण को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अजय पाठक, श्री भारत मस्तुरिया, श्री हरिशंकर कुशवाहा एवं नवल वर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री सतीश पांडे “उद्यान” ने किया, जबकि श्रीमती मधु मौर्य ने आभार प्रदर्शन किया।
समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों की उपस्थिति रही। उपस्थित प्रमुख जनों में श्री राघवेंद्र दीवान, दिलीप कुमार वस्त्रकर, दुर्गा प्रसाद मेरसा, केवल कृष्ण पाठक, डॉ. अजय पाठक, डॉ. जी.डी. पटेल, एस.के. सोनी, दिनेश्वर राव जाधव, भारत मस्तुरिया, श्रीमती सीमा पांडे, श्रीमती कमलेश पाठक, खेलन कुर्रे, आरती यादव, श्रीमती ललिता यादव, श्रीमती चंदा मौर्य, ममता मौर्य, कंचन मौर्य, सरला सिंह, अन्नपूर्णा सिंह पवार, जलेश्वरी वस्त्रकर, अशरफीलाल सोनी, द्वारिका वैष्णव, सामाजिक लाल, अशोक कुमार मौर्य, चंद्रशेखर वर्मा, डॉ. सुरेश सिंह पवार, डॉ. राजेश कुमार मानस, जगतारण डाहरे, श्रीमती रश्मि अग्रवाल, धनेश्वरी सोनी, लेखनी यादव, एस.पी. श्रीवास्तव, आई.एस. सोनवानी, राकेश खरे, श्रीमती वंदना खरे, दुर्गा चरण मौर्य, श्रीमती दुर्गा चरण मौर्य, नितेश मौर्य, पुष्पा मौर्य सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यह आयोजन साहित्य, समाज और समकालीन मुद्दों पर सार्थक संवाद का सशक्त मंच बनकर उभरा, जिसने उपस्थित जनों को विचार और अभिव्यक्ति की नई ऊर्जा प्रदान की।

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