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रंग पंचमी आज

राजस्थान राजसमन्द





रंग पंचमी आज

5 किलो केसर से तैयार रंग, पुजारी-श्रद्धालु होंगे सराबोर, दोपहर साढ़े 3 बजे शुरू होगा रंग महोत्सव




चारभुजा मंदिर में फागोत्सव की धूम परवान पर, आज ठाकुरजी संग तोप गर्जना के साथ खेलेंगे केसरिया होली

चारभुजा

चारभुजा गढ़बोर में इन दिनों 16 दिवसीय फागोत्सव की धूम पूरे परवान पर है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन भक्ति, संगीत और रंगों की छटा देखने को मिल रही है। इसी क्रम में रविवार को रंग पंचमी पर यहां विशेष आयोजन होगा, जिसमें ठाकुरजी को 5 किलो केसर से बने रंग, हल्दी और अबीर गुलाल से होली खेलाई जाएगी। प्रदेश का पहला मंदिर जहां केशर के रंग से होली खेली जाती हैं।

की बोरों को जरा नति को

इस दौरान पुजारी, श्रद्धालु और दर्शनार्थी भी केसरिया रंग में सराबोर होकर एक-दूसरे के साथ रंग पंचमी का आनंद लेंगे। पुजारी ललित गुर्जर ने बताया कि रंग पंचमी के दिन दोपहर बाद विशेष धार्मिक आयोजन क होंगे। ठीक साढ़े तीन बजे बाल स्वरूप ठाकुरजी को मंदिर के गर्भगृह

से बाहर लाया जाएगा। इसके बाद ठाकुरजी को चांदी के झूले में विराजित कर आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। पुष्प, अबीर गुलाल से होली खोलाई जाएगी तथा प्रभु के समक्ष पुजारियों द्वारा हरजस और रसिया गान किया जाएगा। उत्सव के समापन के बाद मंदिर परिसर की

साफ-सफाई की जाती है और हरजस गान के बीच बाल स्वरूप ठाकुरजी को पुनः विधिवत उनके निज मंदिर में विराजित कराया जाता है। इस प्रकार भक्ति, परंपरा और रंगों के संगम के साथ चारभुजा में रंग पंचमी का यह भव्य आयोजन संपन होता है।

ताप गर्जना के साथ प्रारंभहोता है रंग महोत्सव : चारभुजा मंदिर प्रांगण में पहले से ही रंग महोत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। चार बड़े कड़ाहों में 5 किलो केसर रंग के साथ हल्दी का रंग घोलकर विशेष रंग तैयार किया जाता है।

यह रंग मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहता है। जैसे ही शाम चार बजे देवस्थान के सिपाही द्वारा परंपरानुसार तोप दागी जाती है, उसी के साथ रंग महोत्सव की शुरुआत हो जाती है और पूरा मंदिर परिसर केसरिया रंग में सराबोर हो उठता है। तोप की आवाज के साथ ही पुजारी हाथों में चांदी और सोने की पिचकारियां, कलश, कटोरे, लोटे और जग लेकर रंग से भरते हैं और ठाकुरजी के निज मंदिर की ओर दौड़ते हैं।

सबसे पहले प्रभु के साथ परंपरागत रूप से होली खेली जाती है। इसके बाद बाहर झूले में विराजित बाल विग्रह स्वरूप ठाकुरजी को भी रंगों से होली खेलाई जाती है। इस दृश्य को देखने के लिए दूर-दराज से आए

श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर परिसर में मौजूद रहते हैं। हजारों सालों से

प्रभु के साथ होली खेलने के बाद पुजारी, मंदिर सेवक और श्रद्धालु एक-दूसरे पर केसरिया रंग और गुलाल डालकर उत्सव को और भी आनंदमय बना देते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति गीत, रसिया और हरजस गान की स्वर लहरियां गूंजती रहती हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। चारभुजा में रंग पंचमी पर होली खेलने की यह परंपरा हजारों साल पुरानी मानी जाती है, जो आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारभुजा धाम पहुंचकर ठाकुरजी के दर्शन करते हैं और इस अद्भुत रंगोत्सव के साक्षी बनते हैं।

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