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शीर्षक: “राजनीति में जवाबदेही का समय – देश को योग्य और ईमानदार नेतृत्व क्यों चाहिए”।

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर संसद और विधानसभाओं में भेजती है। लेकिन आज एक बड़ा प्रश्न समाज के सामने खड़ा है—क्या राजनीति में वही अनुशासन और योग्यता की कसौटी होनी चाहिए, जो एक सामान्य सरकारी कर्मचारी के लिए होती है?
जब कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी में प्रवेश करता है, तो उसे कई कठिन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है—
परीक्षा, साक्षात्कार, पुलिस सत्यापन, मेडिकल जांच और चरित्र प्रमाण। इन सबके बाद ही उसे देश की सेवा का अवसर मिलता है।
लेकिन विडंबना यह है कि राजनीति में प्रवेश के लिए ऐसी कोई अनिवार्य व्यवस्था नहीं है। कई बार ऐसे लोग भी सत्ता तक पहुँच जाते हैं जिन पर गंभीर आरोप या मुकदमे चल रहे होते हैं। यही कारण है कि समाज में यह प्रश्न उठने लगा है कि यदि सरकारी कर्मचारी पर आरोप सिद्ध हो जाए तो उसे नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता है, उसकी पेंशन रोकी जा सकती है—तो फिर सार्वजनिक जीवन में बैठे नेताओं के लिए कठोर जवाबदेही क्यों नहीं?
आज स्थिति कई बार उलटी दिखाई देती है। बड़े-बड़े शिक्षित और अनुभवी अधिकारी भी कभी-कभी ऐसे नेताओं की चापलूसी करने के लिए मजबूर दिखते हैं जिनकी योग्यता और समझ पर सवाल उठते हैं। इस स्थिति को देखकर बरसों पहले आई फिल्म Gopi का वह प्रसिद्ध गीत याद आ जाता है—
“Ramchandra Keh Gaye Siya Se”
हे रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा
हंस चुगेगा दाना तिनका, कौआ मोती खाएगा।
यह पंक्ति आज की राजनीति पर भी कई बार सटीक बैठती प्रतीत होती है।
इसी पृष्ठभूमि में कुछ युवा नेता ऐसे भी हैं जो व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की बात करते हैं। उदाहरण के तौर पर Raghav Chadha जैसे नेता संसद में कई बार ऐसे मुद्दे उठाते रहे हैं जो राजनीति में जवाबदेही, पारदर्शिता और व्यवस्था सुधार की मांग करते हैं।
युवा पीढ़ी और वे वरिष्ठ नागरिक जिन्होंने देश का इतिहास और लोकतंत्र का विकास देखा है, उनके लिए यह समय सोचने का है—
क्या हम ऐसी राजनीति चाहते हैं जो केवल सत्ता और चापलूसी पर आधारित हो, या ऐसी राजनीति जो देश के विकास, ईमानदारी और नीति-आधारित नेतृत्व को आगे लाए?
लोकतंत्र की असली शक्ति जनता है। जब जनता जागरूक होकर योग्य, विनम्र और दूरदर्शी नेताओं का समर्थन करती है, तभी देश सही दिशा में आगे बढ़ता है।
यदि राजनीति में भी योग्यता, नैतिकता और जवाबदेही को महत्व दिया जाए, तो निश्चित ही भारत का लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।
समय आ गया है कि नागरिक केवल नारों या प्रचार से नहीं, बल्कि विचार, नीति और चरित्र के आधार पर नेतृत्व का चुनाव करें।
तभी देश की वास्तविक उन्नति और विकास संभव है।

लेखक और देश चिंतक
— डॉ. मोहिंदर सिंह बाली

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