हुआं हुआं हुआं हुआं
हुआं हुआं हुआं हुआं
चारों ओर,
हुआं हुआं हुआं हुआं
हुआं हुआं हुआं हुआं
हुआं हुआं हुआं हुआं... होता दिखाई-सुनाई दे रहा है।
बच्चों की फीस पॉकेट पर बोझ बन गई है। दैनिक जरूरत की चीजें, राशन-पानी की कीमतें दोगुनी हो चुकी है! इसपर कहीं कोई बहस नहीं।
इस बीच कहीं किसी #सियार ने हुआं कर दिया और हम सब भूखा सियार टाइप से रोने लगते हैं- हुआं हुआं हुआं हुआं...!
आइए, अब अभी के मनुष्य और सियार की रुलाई में फर्क समझने की कोशिश करते हैं। सियार के रोने यानी हुआं हुआं करने के पीछे की समझ है कि कोई एक भूखा सियार रोया हुआं... और सारे सियार मिलकर जोर जोर से रोने लगे- हुआं हुआं हुआं हुआं...!
और मनुष्य में...! कहीं एक पेट भरे व्यक्ति कुछ उल्टी किया और फिर...! कोई चाटने लगता है कोई उल्टी करने लगता है...! भरे पेट वालों की जमात हुआं हुआं करने लगती है और धीरे-धीरे भूखा मानुष भी उसी में ट्रांसफॉर्म होकर सियार की रुलाई रोने लगता है- हुआं हुआं हुआं हुआं...!