राष्ट्रीय महाविद्यालय बदायूं की एनएसएस इकाई का सात दिवसीय विशेष शिविर प्रारंभ
बदायूं। राष्ट्रीय महाविद्यालय बदायूं की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की तृतीय इकाई रानी लक्ष्मीबाई का सात दिवसीय विशेष शिविर ग्राम पड़ौआ स्थित भीमराव अंबेडकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता की अध्यक्षता में तथा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति बिश्नोई के नेतृत्व में संपन्न हुआ। शिविर का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया गया। शिविर के प्रथम दिन को संकल्पना दिवस के रूप में मनाया गया, जिसमें स्वयंसेविकाओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत एवं लक्ष्य गीत प्रस्तुत कर अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से स्वयंसेवी ग्रामीण समाज से जुड़कर अपने व्यक्तित्व का विकास करते हैं और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करते हैं। वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार जायसवाल ने कहा कि सेवा ही जीवन है और एनएसएस ऐसा मंच है जिसके माध्यम से हम अपने व्यक्तित्व के विकास के साथ-साथ देश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना त्याग, समर्पण और सेवा की भावना से कार्य करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्राओं को शिविर के सफल संचालन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ज्योति बिश्नोई ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वयंसेविकाओं की टोलियां बनाकर उनके दायित्व निर्धारित किए। इस अवसर पर श्रीमती शशि प्रभा ने कहा कि जीवन अनमोल है और हमें अपने समय का सदुपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। वहीं डॉ. प्रेमचंद ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य समाज को जनहित से जुड़े विषयों पर जागरूक करना है और हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। शिविर में सरिता, पूर्णिमा तोमर, ज्योति सागर, वैष्णवी मिश्रा, अंशिका शर्मा, महिमा, वैष्णो, मुस्कान, साहिबा, पायल, पारुल, मोहिनी, इशू दीक्षित, प्रतीक्षा हीरा, भावना, काजल, आकांक्षा, शीतल, श्रद्धा, सोनी, मनीषा, सलोनी, आरती, काम्या सिंह, प्रिया गोले, गायत्री सहित अनेक स्वयंसेविकाएं मौजूद रहीं। संवाद