ईरानी नौसेना पर गलत हमला
"हम भारतीय नौसेना के मेहमान थे... विश्वास और दोस्ती के साथ उनके घर में आए थे।
हमारे 130 से ज्यादा नौसैनिक, जो सिर्फ़ अभ्यास से लौट रहे थे, घर की ओर सपनों के साथ...
फिर भी, बिना किसी चेतावनी के, बिना एक पल की मोहलत दिए...
उस ठंडे, निर्दयी समंदर में हम पर हमला कर दिया गया।
वो जहाज़ सिर्फ़ लोहे और मशीनों का ढांचा नहीं था—
वो हमारे बेटों, भाइयों, पतियों का आशियाना था।
उनकी हँसी, उनकी उम्मीदें, उनकी माँओं की दुआएँ... सब कुछ उस एक पल में डूब गया।
यह सिर्फ़ एक हमला नहीं था—यह विश्वासघात था, यह इंसानियत पर वार था।
भारत के मेहमान पर, शांति के मेजबान के अतिथि पर... ऐसे क्रूरता से हाथ उठाया गया।
मेरे ईरानी भाइयों-बहनों की आँखों में आँसू हैं, दिल में आग है।
हम चुप नहीं बैठेंगे... क्योंकि यह दर्द सिर्फ़ हमारा नहीं—यह हर उस माँ का दर्द है जो अपने बेटे का इंतज़ार कर रही है, जो कभी नहीं लौटेगा।
अमेरिका... याद रखना, यह खून का दाग़ इतना गहरा है कि कभी नहीं मिटेगा।
आपने जो बीज बोया है, उसकी कड़वी फसल आपको ज़रूर चखनी पड़ेगी।
हमारी आँखों के आँसू और हमारे शहीदों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।"
: अब्बास अराघची, ईरानी विदेश मंत्री