महाराष्ट्र बजट पर अल्पसंख्यकों की अनदेखी का आरोप
मुंबई, सूत्र
महाराष्ट्र महायुति सरकार द्वारा पेश किए गए ताज़ा बजट को लेकर अल्पसंख्यक समाज में नाराज़गी सामने आई है। आरोप लगाया जा रहा है कि बजट में अल्पसंख्यकों के लिए न तो कोई विशेष योजना घोषित की गई और न ही शिक्षा, रोज़गार या सामाजिक कल्याण के लिए ठोस प्रावधान दिखाई देता है।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए अबू आसिम आज़मी ने कहा कि वर्षों से विभिन्न समितियाँ और आयोग अल्पसंख्यकों को आरक्षण तथा विशेष सहायता देने की सिफारिश करते रहे हैं, लेकिन आज तक उन सिफारिशों पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ। उनके अनुसार बजट में अल्पसंख्यकों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपने जज़्बात व्यक्त करने के लिए उर्दू भाषा का सहारा लिया जाता है, लेकिन बजट में उर्दू भाषा के विकास के लिए लगभग शून्य प्रावधान रखा गया है। उर्दू स्कूलों, तालीमी इदारों और उर्दू शिक्षकों के लिए भी कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
आज़मी ने आरोप लगाया कि एक तरफ विभिन्न धर्मस्थलों के लिए फंड दिए जाते हैं और दरगाहों पर आस्था दिखाई जाती है, लेकिन बजट के समय अल्पसंख्यकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार आरक्षण नहीं दे सकती और पर्याप्त बजट नहीं रख सकती, तो कम से कम मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को सम्मान और बराबरी का हक़ दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक ओर छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलने का दावा करती है, लेकिन दूसरी ओर अल्पसंख्यकों के साथ नाइंसाफ़ी दिखाई देती है। उनके मुताबिक केवल शिवाजी महाराज के नाम का इस्तेमाल करना और समाज में नफरत का माहौल बनाना महाराष्ट्र की परंपरा के खिलाफ है।