पुलिस हिरासत में युवक की मौत से भड़का आक्रोश : खरसिया में चौहान समाज का प्रदर्शन, न्यायिक जाँच की माँग
चित्रसेन घृतलहरे, AIMA MEDIA //खरसिया/रायगढ़। रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम पारसकोल में पुलिस हिरासत में युवक की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। हत्या के एक मामले में संदिग्ध के रूप में पकड़े गए युवक रमेश चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाते हुए मामले की न्यायिक जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना को लेकर चौहान समाज में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। गुरुवार को समाज के हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और खरसिया में विशाल रैली निकालकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर एसडीओपी कार्यालय और एसडीएम कार्यालय का घेराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हिरासत में मारपीट का आरोप
मृतक की पत्नी किरण चौहान ने रायपुर स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया है कि उनके पति रमेश चौहान को 1 और 2 मार्च 2026 को खरसिया थाना पुलिस ने हिरासत में रखा था। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ गंभीर मारपीट की, जिससे उनकी हालत बेहद खराब हो गई।
परिजनों का आरोप है कि मारपीट के कारण रमेश चौहान के पेट, सीने, सिर और पैरों के तलवों पर गंभीर चोटें आईं और उनका आधा शरीर लगभग सुन्न हो गया। बाद में पुलिस ने ग्राम पंचायत के सरपंच को फोन कर जानकारी दी कि रमेश चौहान की तबीयत अचानक खराब हो गई है और उन्हें खरसिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल से रायगढ़ और फिर रायपुर रेफर
सूचना मिलने के बाद परिजन और सरपंच अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल रायगढ़ जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उनसे जबरन सुपुर्दनामा पर हस्ताक्षर करवा लिए और मरीज को अस्पताल में छोड़कर वहां से चले गए।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज में परेशानी आने लगी। परिजनों ने घायल रमेश चौहान को एक पिकअप वाहन की ट्रॉली में बैठाकर एसडीएम कार्यालय पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी। स्थिति को देखते हुए एसडीएम ने तत्काल सहायता करते हुए परिजनों को 5 हजार रुपये दिए तथा एक निजी एंबुलेंस चालक को 2500 रुपये देकर मरीज को रायगढ़ भेजने की व्यवस्था कराई।
सीटी स्कैन में गंभीर चोट का खुलासा
रायगढ़ अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन में डॉक्टरों ने बताया कि रमेश चौहान के सिर की नस फट गई है और मस्तिष्क में रक्त जमने की स्थिति बन रही है। हालत गंभीर देखते हुए उन्हें तत्काल रायपुर के डीकेएस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
एंबुलेंस में देरी, निजी व्यवस्था से रायपुर पहुंचाया
परिजनों के अनुसार रायपुर ले जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस से संपर्क किया गया, लेकिन करीब दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच ने निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और लगभग 6500 रुपये खर्च कर उन्हें रायपुर के डीकेएस अस्पताल पहुंचाया गया।
रायपुर में कई दिनों तक इलाज चलता रहा, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः 5 मार्च 2026 को उपचार के दौरान रमेश चौहान की मौत हो गई।
पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप
मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर खरसिया थाना प्रभारी टीआई राजेश जांगड़े और अन्य पुलिसकर्मियों पर थर्ड डिग्री टॉर्चर कर हत्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हिरासत में की गई मारपीट के कारण ही रमेश चौहान की जान गई।
हालांकि पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताया है। इस मामले में एसडीओपी ने कहा है कि पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग
प्रार्थना पत्र में मृतक की पत्नी ने मांग की है कि इस मामले को पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत मानते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176(1A) के तहत न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही मृतक का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से कराया जाए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए।
इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी बाहरी और आंतरिक चोटों का विस्तृत उल्लेख करने, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा मामले में संलिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल
घटना के बाद खरसिया क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। आक्रोशित परिजन और ग्रामीण तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर भारी गहमागहमी और हलचल का माहौल बना हुआ है।