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रिपोर्टर आशीष कुमार, बिहार सरकार ने नशे को कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए क्या महाप्लान तैयार हर जिले में खुलेगा नारकोटिक्स थाना।

बिहार सरकार ने राज्य में बढ़ते नशे के कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए एक 'महा-प्लान' तैयार किया है। अब राज्य के हर जिले में नारकोटिक्स थाना खोला जाएगा। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों (ड्रग्स) से जुड़े मामलों की जांच में तेजी लाना और बड़े सिंडिकेट को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुँचाना है।

बिहार सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 'मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो' का गठन किया है।अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से नारकोटिक्स और CID से शराबबंदी इकाई को अलग कर इस नए ब्यूरो में मिला दिया गया है।अब पुलिस शराब और सूखे नशे (ड्रग्स, चरस, अफीम) दोनों के खिलाफ एक साथ, एक ही छत के नीचे से कार्रवाई कर सकेगी।

इस नए मिशन को एडीजी (मद्य निषेध) खुद लीड कर रहे हैं। राज्यभर में सक्रिय 218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) अब सीधे इसी ब्यूरो के आदेश पर काम करेंगी। यानी, बिहार में नशे के खिलाफ अभियान का पूरा 'रिमोट कंट्रोल' अब एक ही कमांड के पास होगा, जिससे कार्रवाई में देरी नहीं होगी।

सरकार ने इस विभाग को मजबूत बनाने के लिए 88 नए पद बनाए हैं और 229 पुराने पदों को यहाँ ट्रांसफर किया जा रहा है। यही नहीं, संविदा पर विशेषज्ञों (Experts) की भी भर्ती होगी ताकि तस्करों के हाई-टेक नेटवर्क और उनके डिजिटल लेन-देन को क्रैक किया जा सके।

अभी तकनीकी कारणों से केस आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में दर्ज हो रहे हैं, लेकिन जैसे ही जिला स्तर पर इन थानों की अधिसूचना जारी होगी, बिहार पुलिस को ड्रग पेडलर्स के खिलाफ सीधी और त्वरित कार्रवाई का पावर मिल जाएगा।।

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