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मध्य-पूर्व में बढ़ते ईरान–इज़राइल तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी हलचल :-

मध्य-पूर्व में बढ़ते ईरान–इज़राइल तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में कतर ने अपने गैस लिक्विफिकेशन (Liquefaction) ऑपरेशनों को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार यह निर्णय क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिम और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए लिया गया है। कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (Liquefied Natural Gas) निर्यातकों में शामिल है, इसलिए इस कदम का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार कतर की गैस उत्पादन और प्रोसेसिंग अवसंरचना पर इस निर्णय का सीधा प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति में अस्थायी कमी आ सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा स्थिति सामान्य होने के बाद संचालन दोबारा शुरू किया जा सकता है, लेकिन पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू होने में कम से कम दो सप्ताह का समय लग सकता है। इस घटनाक्रम का प्रभाव भारत पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है, जो सालाना करीब 27 मिलियन टन के आसपास बताया जाता है। ऐसे में यदि कतर की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा आती है तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से गैस खरीदने की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे लागत में वृद्धि की संभावना बन सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति में व्यवधान लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत के घरेलू बाजार में भी दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि ये दोनों ही ईंधन एलएनजी आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव आने वाले दिनों में भारत सहित कई देशों की ऊर्जा नीति और बाजार कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

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