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असम में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज :-

असम में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के प्रमुख और पूर्व बोडोलैंड प्रमुख प्रमोद बोरो ने असम से राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। उनके साथ भाजपा के विधायक तेराश गोवाला और राज्य सरकार में मंत्री जोगेन मोहन ने भी नामांकन प्रक्रिया में भाग लिया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और सत्ता पक्ष की रणनीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।विधानसभा की मौजूदा संख्या बल के आधार पर माना जा रहा है कि दो राज्यसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में लगभग तय मानी जा रही हैं। लेकिन इसके साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) तीसरी सीट हासिल करने के लिए भी रणनीतिक प्रयास करता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार यह सीट प्रमोद बोरो के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनका राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत प्रभाव है।विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली और संभावित क्रॉस-वोटिंग निर्णायक भूमिका निभा सकती है। चूंकि इस समय कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है, इसलिए विपक्ष के वोटों का बिखराव एनडीए के लिए अवसर बन सकता है। इसी गणित के आधार पर सत्ता पक्ष तीसरी सीट जीतने की संभावना तलाश रहा है, जिसे कई राजनीतिक पर्यवेक्षक एक “चाणक्य शैली की रणनीति” के रूप में देख रहे हैं।यदि यह रणनीति सफल होती है तो असम की राजनीति में इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। प्रमोद बोरो का राज्यसभा पहुंचना न केवल बोडोलैंड क्षेत्र की राजनीतिक प्रतिनिधित्व को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा, बल्कि एनडीए गठबंधन की रणनीतिक क्षमता को भी दर्शाएगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विपक्षी दल इस चुनौती का किस तरह सामना करते हैं और राज्यसभा चुनाव का अंतिम परिणाम असम की राजनीतिक दिशा को किस हद तक प्रभावित करता है।

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