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मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और तेल सप्लाई पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा सप्लाई के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं. इसी बीच करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास मौजूद बताया जा रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर भारत की रिफाइनरियों तक भेजा जा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय महासागर और एशियाई जलक्षेत्र में करीब 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल टैंकरों में मौजूद है, जिसे जरूरत पड़ने पर जल्दी भारत भेजा जा सकता है.
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट है.
भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40-50% हिस्सा इसी रास्ते से आता है.
अगर यह समुद्री मार्ग बाधित होता है तो तेल सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है.
यही वजह है कि भारत सरकार और तेल कंपनियां वैकल्पिक सप्लाई प्लान तैयार कर रही हैं.