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पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध का संकट गहराया

1. ईरान और अमेरिका के बीच सीधा टकराव:
हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने के बाद ईरान ने इसे "युद्ध की घोषणा" करार दिया है। इसके जवाब में कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए हैं, जिसमें भारी नुकसान की खबर है।
​2. इजरायल और लेबनान में भारी गोलाबारी:
इजरायली वायुसेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्सों पर भीषण बमबारी की है। इजरायल का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह के मुख्य कमांड सेंटरों को निशाना बनाया है। वहीं, लेबनान की ओर से भी उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दागे जा रहे हैं।
​3. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर:
​तेल की कीमतें: खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $110 प्रति बैरल को पार कर गई हैं।
​सप्लाई चेन: लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से दुनिया भर में जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने का डर है।
​4. मानवीय संकट:
लेबनान और सीरिया के सीमावर्ती इलाकों से लाखों लोग पलायन कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध नहीं रुका, तो यह इस सदी का सबसे बड़ा मानवीय संकट बन सकता है।
​5. कूटनीतिक प्रयास विफल:
रूस और चीन ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है। कई देशों ने अपने दूतावास खाली करना शुरू कर दिया है।
​यह स्थिति भारत के लिए भी चिंताजनक है क्योंकि वहां लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर है।

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