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नवसस्येष्टी (होली) की पाली में निकली शोर्य एवं एकता की प्रतीक ऐतिहासिक गांवशाही गेर, आज खुलेंगे बाजार।

नवसस्येष्टी (होली) की पाली में निकली शोर्य एवं एकता की प्रतीक गांवशाही गेर, आज खुलेंगे बाजार।

पाली शहर सहित जिले भर में सोमवार को होली दहन किया गया और अगले दिन मंगलवार को कुछ समाजों ने गेर निकालकर एक दुसरे के घर जाकर होली की शुभकामनाएं दी। वहीं चंद्र ग्रहण रहने के कारण कुछ लोग बुधवार को होली खेलते नजर आए। सिरवी समाज, घांची समाज, माली समाज, जांगिड़ समाज सहित अलग-अलग समाजों द्वारा अपनी अपनी गेर निकाली गई । समाजों में नए जन्मे बच्चों लड़के और लड़कियों की ढूंढ की गई। लोग गली-मोहल्लों में एक-दूजे को रंग गुलाल लगाकर होली की शुभकामना देते नजर आए।

पाली शहर में गांवशाही गेर के लिए शांति समिति और जिला प्रशासन द्वारा मंगलवार को गेर निकालना तय किया था । लेकिन चन्द्र-ग्रहण के चलते कुछ समाजों ने रूचि नहीं दिखाई इसलिए बुधवार शाम को 5 बजे से सभी समाजों के लोग शहर के जोधपुरिया बास की बारी के पास एकत्रित होने लगे जो छ बजे तक गांवशाही गेर का रूप धारण कर प्यार चौक की तरफ आगे बढे। यहां से आधा किलोमीटर दूर विश्वकर्मा मंदिर पहुंचने में गेर को दो घंटे लगे। विश्वकर्मा मंदिर में आरती करके जुम्मा मस्जिद के सामने गेर का मुस्लिम समाज के शहर काजी और जांगिड समाज के अध्यक्ष सहित शहर के गणमान्य जनों द्वारा पुलिस अफसरों और गेर नेतृत्व करनें वाले समाज जनों का स्वागत करने के बाद गेर विधिवत पास होने की घोषणा की गई। इसको लेकर जोधपुरीयां बास की बारी से लेकर जुम्मा मस्जिद तक सुरक्षा में भारी पुलिस जाप्ता तैनात रहा।

इससे पूर्व बुधवार को सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजें तक पांच वर्ष के बालक से 65 वर्ष के बुजुर्ग, प्रौढ और युवा स्त्री पुरूषों तथा बालक बालिकाओं ने जमकर एक दुसरे पर अंम्बीर गुलाल और रंग की धार तथा पानी डालकर होली खेली और अपने-अपने हम उम्रदराज की ग्रुपों में सेल्फी लेकर खुशी जाहिर की।

पाली शहर के बाहरी भाग चिमनपुरा पुराना हाउसिंग बोर्ड, नया हाउसिंग बोर्ड, अशोक नगर, रामदेव रोड, सिंधी कॉलोनी और भीतरी भाग में पानी दरवाजा, सराफा बाजार, धानमंडी, सोमनाथ, सूरज पोल के हर चौहराये पर युवक युवतियों और घरों की छत तथा बालकानी पर खड़े होकर बच्चों द्वारा निचे से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों पर रंग से भरें गुब्बारे और प्लास्टिक की थैलियां फेंककर खुशी मनाते नजर आए। तीन चार बजे तक सबने होली खेली पश्चात सब अपने-अपने घरों में जाकर स्नान करके एक दुसरे के घर जाकर होली की शुभकामनाएं दी। गृहस्थ लोगों ने बधाई देने आने वालों की मिठाई फल शर्बत ठंडाई आईसक्रीम आदि की मनुहार कर आदर्श गृहस्थ धर्म का पालन किया।

रिपोर्ट - घेवरचन्द आर्य

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