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सिर्फ रंग नहीं, यहाँ परंपराएं भी जीवंत हुईं: वैर बादशाहपुर का शानदार होली उत्सव।"

वैर बादशाहपुर में जीवंत हुई प्राचीन परंपराएँ: फाग के गीतों और आपसी सौहार्द के साथ मनी 'अपनी वाली होली'
वैर बादशाहपुर (बुलंदशहर):
आधुनिकता की चकाचौंध के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजते हुए, ग्राम पंचायत वैर बादशाहपुर में इस वर्ष होली का पर्व अभूतपूर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के तहसील अध्यक्ष जगवीर भाटी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उन विलुप्त होती पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित किया, जो कभी इस अंचल की पहचान हुआ करती थीं।
लोकगीतों की गूंज और द्वार-द्वार दस्तक
उत्सव का मुख्य आकर्षण ग्रामीणों की वह 'टोली' रही, जिसने गाँव के प्रत्येक घर जाकर दस्तक दी। ढोल-नगाड़ों की थाप और होली के पारंपरिक लोकगीतों (फाग) ने पूरे वैर बादशाहपुर को भक्ति और आनंद के रंगों से सराबोर कर दिया। बुजुर्गों के आशीर्वाद और युवाओं के उत्साह ने इस आयोजन को एक सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया।
सांस्कृतिक विरासत और प्रबंधन
कार्यक्रम का कुशल संचालन राजपाल सिंह द्वारा किया गया, जबकि आयोजन की वित्तीय देखरेख कोषाध्यक्ष हेम सिंह भाटी ने बखूबी निभाई। हर घर में टोली का भव्य स्वागत पारंपरिक मिष्ठान और प्रसाद के साथ किया गया, जिसमें बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने भविष्य की पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया।
समुदाय की एकजुटता
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कार्यक्रम संयोजक उमेश भाटी, नेपाल सिंह, किशन सिंह, मिंटू सोलंकी और राजकुमार शर्मा का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर महेश भाटी, वीरेंद्र सिंह, कल्लू सिंह, उदयपाल सिंह, देवेंद्र भाटी, योगेश भाटी, महेंद्र सिंह (दरोगा जी), लेखराज सिंह, केक सिंह, भरत भाटी, केपी सिंह और सत्येंद्र सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
एकजुटता का संदेश
तहसील अध्यक्ष जगवीर भाटी ने समापन पर ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए कहा, "होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे का प्रतीक है। वैर बादशाहपुर में हमारा यह प्रयास अपनी लुप्त होती ग्रामीण संस्कृति को बचाने का है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और गौरवशाली विरासत पर गर्व कर सकें।"

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