होली पर कविता
खेलत खेलत रंग में रसिया, मंद मंद मुस्कुराय,
रसिया मंद मंद मुस्कुराय।
और कहा है ब्रज की टोली, राधा संग ढूंढ ना पाये,
रसिया राधा संग ढूंढ ना पाये।।
आ गुलाल उड़ा उड़ा, लगवात रंग है, राधा राधा बोली,
रसिया राधा राधा बोली।
ब्रज में सब खेलत है मोहन संग सब होली,
रसिया मोहन संग सब होली।
आ टोली टोली मटकी फोड़े, ब्रज के छोरा छोरी,
रसिया ब्रज के छोरा छोरी।
आ ब्रज में होत है लठमार होली, खेलत सब जन मिलजूली,
रसिया खेलत है सब जन मिलजुली,
ब्रज में होत है सबसे सुंदर, सुंदर में सुंदर होली,
रसिया सुंदर में सुंदर होली।।
आरे वहां अवध में खेलत है होली, चार भाइयों की टोली,
अवध में चार भाइयों की टोली।
जहां उड़ावत है रंग गुलाल अवध में,
राम लक्ष्मण और भरत शत्रुघ्न की जोड़ी,
अवध में चार भाइयों की जोड़ी,
अवध में राम मय हुआ होली,
अवध में राम मय हुआ होली।।
और सबके हाथ में सब रंग है कोई जाति धर्म ना होई,
भारत में ऐसा होत है होली,
भारत में ऐसा होत है होली।
और राम राज्य की परिकल्पना से,
यहां होत है रंगों की होली,
यहां होत है प्यार की होली,
आ भारत में झूमत झूमत सब खेलत है रंगों की होली,
और प्यार मोहब्बत शांति से, मनावत है यहां सब होली,
भारत में ऐसा होत है होली।
आ सब जन मनाओ, सब मिल के प्यार के रंगों की होली,
भारत में होत है प्यार और गुलाल की होली।।
आ उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक,
खेलो सब मिलजुल होली।
आ काशी की तो बात ही छोड़ो,
भोले नाथ की मसाने की होली ,
आरे रंग में भंग ना डाले कोई,
महादेव संग सब खेले होली,
महादेव संग सब खेले होली।।
सब पर सब कुछ लूटावत है भोले,
प्रेम अनुराग की रंग रोली,
प्रेम अनुराग की रंग रोली ।
काशी में विश्वनाथ जी संग खेलो रंगों की खुब होली,
काशी में ऐसा होत है होली, काशी में ऐसा होत है होली ।।
होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं और बधाई 🙏 ❤️🌹🎉
सप्रेम धन्यवाद
🙏❤️🌹🎉