चिखली जमुनिया में 10 लाख की सीसी सड़क और 25 लाख का सामुदायिक भवन सवालों के घेरे में, भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप।
चिखली जमुनिया में 10 लाख की सीसी सड़क और 25 लाख का सामुदायिक भवन सवालों के घेरे में, भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप।
देवरी सागर /
मध्यप्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर जारी करोड़ों की राशि क्या जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है? ताज़ा मामला सागर जिले की देवरी तहसील अंतर्गत केसली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चिखली जमुनिया से सामने आया है, जहाँ करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनी सीसी सड़क और लगभग 25 लाख रुपये की लागत से बन रहा सामुदायिक भवन गंभीर सवालों के घेरे में है।
कटारे के घर से श्मशान घाट तक बनाई गई सीसी सड़क की मोटाई महज 2 से 3 इंच बताई जा रही है। आरोप है कि सड़क के दोनों किनारों पर मिट्टी हटाकर मोटाई का दिखावा किया गया, जबकि बीच का हिस्सा बेहद पतला रखा गया।
निर्माण कार्य में न तो हार्डकोर डाला गया, न पॉलिथीन शीट बिछाई गई, न ही वाइब्रेटर का उपयोग किया गया। स्थानीय स्तर की सीमेंट और डस्ट का इस्तेमाल कर गुणवत्ता से समझौता किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस सड़क पर कोई ट्रैक्टर या भारी वाहन गुजर जाए तो सड़क के टूटने की पूरी आशंका है।
इतना ही नहीं, स्कूल के सामने बन रहे लगभग 25 लाख रुपये के सामुदायिक भवन में भी डस्ट का उपयोग कर घटिया निर्माण किए जाने के आरोप लगे हैं। निर्माण कार्य की शुरुआत से ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनपद पंचायत केसली के सब इंजीनियर और सीईओ निर्माण कार्यों का निरीक्षण नहीं करते? क्या शासन की राशि के खुलेआम दुरुपयोग पर कोई
जवाबदेही तय होगी?
इस मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच प्रशांत यादव का कहना है कि सड़क राशि के अनुसार सही बनी है और जिसे जो उचित लगे वह कर सकता है। वहीं केसली जनपद के सब इंजीनियर संतोष राय ने निरीक्षण कर अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।
जनपद पंचायत केसली की सीईओ प्रतिष्ठा जैन ने भी शिकायत मिलने के बाद जांच कराने और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जिला पंचायत सागर के सीईओ विवेक के. भी ने केसली सीईओ को जांच के निर्देश देने की बात कही है।
अब देखना यह है कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में दोषियों पर ठोस कार्रवाई होती है। क्या भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी या मामला फिर से रफा-दफा कर दिया जाएगा?
फिलहाल, पूरे मामले ने पंचायत स्तर पर हो रहे विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।