रूजहा कलां (खुटार) में स्वच्छता अभियान फेल? होली से पहले गंदगी ने खोली व्यवस्था की पोल!
होली (2–4 मार्च 2026) से पहले प्रदेश में स्वच्छता का बिगुल बज चुका है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘स्वच्छता और सफाई सुरक्षा अभियान’ के तहत घाटों, तालाबों, अमृत सरोवरों और गांवों में फॉगिंग, एंटी-लार्वा स्प्रे व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सख्त निर्देश दिए हैं। दावे बड़े हैं, तस्वीरें चमकदार हैं… लेकिन रूजहा कलां (खुटार) में हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
जमीनी सच्चाई: नालियां जाम, गंदगी आम
रूजहा कलां (खुटार) की नालियां कीचड़ से लबालब हैं। सड़कों पर कचरे के ढेर, बदबू और मच्छरों का बढ़ता प्रकोप—त्योहार से पहले गांव का माहौल बदहाल। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो-तीन दिनों से सफाई कर्मी गांव में दिखाई तक नहीं दिए।
सबसे बड़ा सवाल—क्या सफाई सिर्फ प्रधान के दरवाजे तक सीमित है? गांववासियों का कहना है कि कर्मी “हाजिरी” लगाकर लौट जाते हैं, जबकि बाकी मोहल्ले गंदगी में डूबे हैं।
कागज़ी अभियान बनाम कड़वी हकीकत
क्या ब्लॉक स्तर पर निगरानी सिर्फ फाइलों में हो रही है?
क्या किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया?
फॉगिंग और एंटी-लार्वा स्प्रे का वास्तविक रिकॉर्ड क्या कहता है?
जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
प्रदेश स्तर पर सख्त संदेश… और गांव में ढीली व्यवस्था! अगर हालात ऐसे ही रहे तो स्वच्छता अभियान पोस्टर, प्रेस नोट और सोशल मीडिया तक ही सिमट कर रह जाएगा।
ग्रामीणों की सीधी मांग
त्योहार से पहले तत्काल व्यापक सफाई, नियमित फॉगिंग, नालियों की सफाई और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए। ग्राम प्रधान व संबंधित सफाई कर्मियों पर स्पष्ट कार्रवाई हो, ताकि गांव में स्वच्छता सिर्फ घोषणा न रहे, हकीकत बने।
अब प्रशासन की परीक्षा है—क्या रूजहा कलां (खुटार) में रंगों से पहले सफाई पहुंचेगी, या फिर होली गंदगी की छाया में ही मनानी पड़ेगी?