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“अन्याय, अहंकार और भ्रष्टाचार की होली जले, सत्य, साहस और विश्वास सदा अमर रहें।”

"होलिका दहन : एक सामाजिक संकल्प ,"
आज सिर्फ लकड़ियाँ नहीं जलेंगी…
आज जलेगा —
अहंकार,
अन्याय,
भ्रष्टाचार,
शोषण,
और बचेगा —
सत्य,
, न्याय
विश्वास,
मानवीय संवेदनाएँ,
होलिका दहन हमें याद दिलाता है कि
जब-जब अत्याचार बढ़ा है,
तब-तब सत्य की अग्नि ने उसे भस्म किया है।
आज जरूरत है कि हम अपने समाज से
भयमुक्त भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही
और कमजोरों पर हो रहे अन्याय को
इसी पवित्र अग्नि में समर्पित करें।
आइए संकल्प लें —
अहंकार की होली जले
न्याय और विश्वास अमर रहें,
विजय कुमार
पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता, गया

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