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"💐होली गीत - रंगों में रची आज प्रीत 💐 "

🌸 होली गीत — “रंगों में रची आज प्रीत” 🌸
(सुर – उल्लासपूर्ण, लोकधुन शैली)
मुखड़ा:
आज फागुन ने द्वार सजाया,
रंगों ने फिर शंख बजाया,
हँसी के संग उड़ी अबीर —
होली आई, होली आई!
अंतरा १:
गुलाल भरे सपनों की थाली,
भींगी चुनर, महकी लाली,
मनवा नाचे बनकर पीर —
रंगों में रची आज प्रीत।
अंतरा २:
राधा सी छेड़े पवन पिचकारी,
कान्हा सी हँसे हर क्यारी,
ढोलक बोले धीर-धीरे —
भीग गई हर एक रीत।
अंतरा ३:
रूठे मन भी गले लगें अब,
मीठे बोलों से रस जगें अब,
भूल चलो सब भेद-भीत —
होली है प्रेम की जीत।
समापन (उच्च स्वर):
सतरंगी सपनों की डोरी,
हाथों में खुशियों की होरी,
हर आँगन गाए संगीत —
रंगों में रची आज प्रीत! 🌈
✽───────────────✽
डिस्क्लेमर:- यह रचना कवि 🖌️🖌️ सुरेश पटेल सुरेश की मौलिक छंद-शैली कृति है; इसके भाव, विचार एवं प्रस्तुति पूर्णत: लेखक के स्वत्वाधिकार में सुरक्षित हैं। ✽───────────────✽

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