तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘एक कहानी’ पहल
बिहार की संस्कृति और इतिहास से रोज रूबरू होंगे बच्चे
पटना, संवाददाता।
सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा तीन से आठ तक के छात्र-छात्राओं को अब प्रतिदिन बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी कहानियां सुनने का अवसर मिलेगा। शिक्षा विभाग नए शैक्षणिक सत्र से “एक कहानी” कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत विद्यालयों में नियमित रूप से ऑडियो आधारित कथाओं का प्रसारण किया जाएगा।
मध्याह्न भोजन के बाद सुनाई जाएंगी कहानियां
निर्देश के अनुसार, मध्यान्ह भोजन के उपरांत कक्षा में लगभग 20 मिनट तक संग्रहालय एवं विरासत आधारित कहानियां सुनाई जाएंगी। इसके बाद शिक्षक बच्चों से कहानी के विषय, पात्र और संदेश पर चर्चा करेंगे। प्रश्नोत्तर, लघु लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
सृजनात्मकता और भाषा कौशल पर जोर
इस पहल का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच, तार्किक दृष्टिकोण और भाषा कौशल का विकास करना है। विभाग का मानना है कि स्थानीय इतिहास और संस्कृति से परिचय बच्चों में आत्मगौरव की भावना भी मजबूत करेगा।
पायलट चरण में नौ जिलों में संचालन
कार्यक्रम का प्रारंभिक क्रियान्वयन राज्य के नौ जिलों—पटना, जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, गया, जमुई, किशनगंज, समस्तीपुर, शिवहर और पश्चिमी चंपारण—के चयनित विद्यालयों में किया गया था। पायलट चरण में प्राप्त सकारात्मक अनुभवों के आधार पर अब इसे चरणबद्ध तरीके से सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में लागू करने की तैयारी है।
विशेषज्ञ संस्थाओं का सहयोग
कहानियों की रूपरेखा और ऑडियो सामग्री तैयार करने में शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग लिया गया है। सामग्री को इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे सरल भाषा में बिहार के ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों और प्रेरक प्रसंगों से परिचित हो सकें।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल न केवल पठन-पाठन को रोचक बनाएगी, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में भी सहायक सिद्ध होगी।