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इजरायल-ईरान जंग में कूदेगा NATO? एक साथ 32 देशों की सेनाएं तेहरान पर करेंगी हमला, WW3 की दस्तक.



दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन NATO के शीर्ष कमांडर ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान की ओर से आने वाले 'संभावित खतरों' से निपटने के लिए अपनी सेनाओं को तैयार कर रहे हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस सुगबुगाहट ने ही दुनिया के बाजारों और राजधानियों में खलबली मचा दी है।

NATO की एंट्री का मतलब

अगर NATO आधिकारिक तौर पर इजरायल के साथ खड़ा होता है, तो इसका मतलब है कि दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अब ईरान के खिलाफ मैदान में होगी। NATO में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा जैसे 32 ताकतवर देश शामिल हैं। इन देशों के पास दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स, परमाणु पनडुब्बियां और मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं। NATO का आना इस युद्ध को केवल 'क्षेत्रीय संघर्ष' से बदलकर एक 'ग्लोबल वॉर' में तब्दील कर देगा। इसके बाद ईरान के लिए बचना लगभग नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि उसे अकेले ही 32 देशों की संयुक्त ताकत का सामना करना होगा।

अनुच्छेद 5 का डर: क्या एक्टिव होगा कयामत का कानून?

NATO का सबसे घातक हथियार उसका 'आर्टिकल 5' है। यह कानून कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे पूरे संगठन पर हमला माना जाएगा। हालांकि इजरायल NATO का सदस्य नहीं है, लेकिन अमेरिका (जो इजरायल का मुख्य सहयोगी है) और कई यूरोपीय देशों के बेस पर ईरान ने मिसाइल हमले किए हैं। अगर ईरान की कोई मिसाइल NATO सदस्य देशों की सीमा या उनके सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाती है, तो आर्टिकल 5 एक्टिव हो सकता है। ऐसी स्थिति में NATO की पूरी फौज 'सामूहिक सुरक्षा' के तहत ईरान पर टूट पड़ेगी।

रूस और चीन की चाल

NATO की इस जंग में एंट्री का सबसे डरावना पहलू रूस और चीन की प्रतिक्रिया है। रूस और चीन ने पहले ही इजरायल-अमेरिका के हमलों को 'संप्रभुता का उल्लंघन' बताया है। अगर NATO युद्ध में कूदता है, तो रूस और चीन हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेंगे। ईरान का रूस के साथ गहरा सैन्य गठबंधन है। यदि रूस ने ईरान को आधुनिक S-400 सिस्टम या अपनी वायुसेना से मदद दी, तो यह सीधे तौर पर NATO बनाम रूस-चीन की जंग बन जाएगी। यही वह स्थिति है जिसे विशेषज्ञ 'तीसरा विश्व युद्ध' (World War 3) कह रहे हैं, जहाँ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होने की संभावना सबसे ज्यादा होगी।

भारत पर असर

अगर NATO इस युद्ध में शामिल होता है, तो भारत के लिए संकट गहरा जाएगा। खाड़ी देशों में रहने वाले 90 लाख भारतीयों की जान पर बन आएगी। समुद्री रास्ते पूरी तरह बंद हो जाएंगे, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल मिलना दूभर हो जाएगा। महंगाई इतनी बढ़ जाएगी कि आम आदमी की कमर टूट जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी की आपात बैठकें इसी ओर इशारा कर रही हैं कि भारत इस 'महायुद्ध' की लपटों से खुद को और अपने नागरिकों को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।

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