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तीन दिवसीय NBSU प्रशिक्षण से लौटे ,बड़ौदा डॉ. अनिल कुमार बाथम ने लिया विशेष प्रशिक्षण



✍🏻श्योपुर, 2 मार्च 2026।

नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल और स्थिरीकरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से Gajra Raja Medical College, ग्वालियर में 26 से 28 फरवरी 2026 तक न्यू-बॉर्न स्टेबिलाइज़ेशन यूनिट (NBSU) पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में विभिन्न जिलों से आए स्वास्थ्यकर्मियों को बीमार और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन (Emergency Newborn Care & Stabilization) के लिए उन्नत कौशल प्रदान किए गए।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित NBSU सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना तथा नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate) में कमी लाना रहा। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को नवजात पुनर्जीवन (Neonatal Resuscitation), तापमान नियंत्रण, संक्रमण प्रबंधन, श्वसन संकट (Respiratory Distress) की पहचान एवं प्राथमिक उपचार, रेफरल प्रोटोकॉल तथा मॉनिटरिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

श्योपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ौदा से मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल कुमार बाथम ने इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान नवजात शिशुओं की आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय लेने, ऑक्सीजन सपोर्ट, आईवी फ्लूइड मैनेजमेंट तथा जीवनरक्षक हस्तक्षेपों (Life-saving Interventions) की प्रक्रियाओं का विस्तृत अभ्यास कराया गया, जिससे जमीनी स्तर पर सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा।

डॉ. बाथम ने कहा कि ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों में समय पर और गुणवत्तापूर्ण नवजात देखभाल अत्यंत आवश्यक है। NBSU स्तर पर सही स्थिरीकरण के बाद ही गंभीर शिशुओं को उच्च स्तरीय संस्थानों में सुरक्षित रेफर किया जा सकता है। यह प्रशिक्षण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस प्रकार के कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NBSU इकाइयों में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध रहे तो नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है तथा सुरक्षित शैशव की दिशा में ठोस प्रगति संभव

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