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काशी में मुस्लिम महिलाओं की रंगों भरी होली, युद्ध के माहौल में दिया विश्व शांति का संदेश


वाराणसी। एक ओर पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव और हिंसा की खबरें दुनिया को चिंतित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर काशी की धरती से प्रेम, सौहार्द और विश्व शांति का अनोखा संदेश सामने आया। लमही स्थित सुभाष भवन में मुस्लिम महिला फाउंडेशन एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गुलालोत्सव में मुस्लिम महिलाओं ने रंगों की होली खेलकर भाईचारे और इंसानियत का पैगाम दिया।



ढोल की थाप, होली गीतों की गूंज और हवा में उड़ते गुलाल ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम में मुस्लिम और हिंदू महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी सौहार्द का परिचय दिया। महिलाओं ने कहा कि शांति, संबंध और सम्मान से ही समाज और राष्ट्र सुरक्षित रह सकते हैं। उनका मानना था कि यदि नफरत की जगह रंगों और प्रेम को अपनाया जाए तो दुनिया में स्थायी शांति स्थापित हो सकती है।



कार्यक्रम में अनाज बैंक की ओर से 300 जरूरतमंद परिवारों-जिनमें बांसफोर, नट, मुसहर और मुस्लिम समुदाय की महिलाएं शामिल रहीं। सभी को होली की पोटली और साड़ी वितरित की गई। साड़ी पाकर महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। मुख्य अतिथि बड़का हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर पंडित रिंकू महाराज ने कहा कि आज दुनिया को मानवता बचाने की जरूरत है और त्योहार ही वह माध्यम हैं जो दिलों को जोड़ते हैं।



मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ‘हनुमान चालीसा फेम’ नाज़नीन अंसारी ने कहा कि भारत की संस्कृति प्रेम और समरसता पर आधारित है। यहां रंगों की होली गले मिलने और रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि हिंसा और कट्टरता से केवल तबाही मिलती है, जबकि मोहब्बत और भाईचारा इंसानियत को जिंदा रखता है।

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि होली नफरत को मिटाकर एक-दूसरे को अपनाने का पर्व है। यदि विश्व के अन्य देशों में भी इस तरह के सांस्कृतिक पर्वों को अपनाया जाए तो कट्टरता की प्रवृत्ति कम हो सकती है। कार्यक्रम में डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, आभा भारतवंशी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। काशी की इस पहल ने यह संदेश दिया कि रंगों की होली ही वह राह है, जो दुनिया को शांति और सद्भाव की ओर ले जा सकती है।

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