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भद्रकाली घाट का सुंदरीकरण या खुला खेल 1.35 करोड़ की लागत पर आधा अधूरा काम ग्रामीणों में आक्रोश

संजय कुमार

जालौन। जनपद जालौन के विकासखंड नदीगांव अंतर्गत ग्राम गड़ेरना स्थित इटोरा माधौगढ़ भद्रकाली नदी घाट पर पर्यटन विभाग द्वारा कराए जा रहे पाटन विकास एवं सुंदरीकरण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 1 करोड़ 35 लाख 61 हजार रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना को लेकर ग्रामीणों ने खुलकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है

ग्रामीणों का दावा है कि स्वीकृत बजट के मुकाबले अब तक केवल 50 प्रतिशत के आसपास ही काम हुआ है, जबकि जो निर्माण कराया गया है, वह भी गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है

निर्माण में खामियों की भरमार

जानकारी के अनुसार अब तक एक कमरा एक बाथरूम, एक शौचालय और एक बरामदा बनाया गया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि

टाइल्स ठीक से नहीं लगाई गईं

प्लास्टर और छत की ढलाई में गुणवत्ता का अभाव

बीम सही तरीके से नहीं डाली गई

कुछ स्थानों पर मिट्टी के ऊपर ही निर्माण

बिना मजबूत आधार के पुताई


इन आरोपों से भवन की मजबूती और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है घाट पर आंशिक रूप से इंटरलॉकिंग बिछाई गई है जबकि शेष कार्य अधूरा पड़ा है

ग्रामीणों का सवाल है कि जब इतनी बड़ी धनराशि स्वीकृत हुई है तो आखिर केवल एक कमरा, बाथरूम और शौचालय ही क्यों खड़े दिखाई दे रहे हैं? बाकी बजट कहां गया

शिकायतें बेअसर, कार्रवाई शून्य

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। फोन पर संपर्क करने पर ठेकेदार ने 50 से 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा किया और उल्टा ग्रामीणों पर काम में बाधा डालने का आरोप लगाया।

हालांकि ग्रामीण इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि वे गुणवत्ता सुधार की मांग कर रहे हैं, बाधा नहीं।

अनशन की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच नहीं कराई गई और गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो वे अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे। मौके पर धीरज द्विवेदी, प्रद्युम्न द्विवेदी, रविन्द्र कुशवाहा, रामदास भास्कर, प्रिंस शर्मा, दिलीप रजक, मुकेश शर्मा, साजन बीडीसी, कल्लू सहित करीब दो दर्जन ग्रामीण मौजूद रहे

अब बड़ा सवाल यह है कि पर्यटन विभाग इस पूरे मामले में चुप्पी क्यों साधे हुए है? क्या करोड़ों की परियोजना भी जांच के दायरे में आएगी या फिर फाइलों में ही ‘सुंदरीकरण’ होता रहेगा

जनता जवाब चाहती है

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