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*मुस्लिम महिलाओं ने गुलाल-फूलों से खेली होली, काशी से काबा को भेजा भाईचारे का संदेश*

वाराणसी: एक ओर जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत को लेकर पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय विरोध दर्ज करा रहा है और महायुद्ध का शंखनाद होता दिखाई पड़ रहा है, तो वहीं विश्व की सांस्कृतिक नगरी काशी में हिंदू-मुस्लिम महिलाओं ने गुलाल व गुलाब की पंखाड़ियों से होली खेल कर काशी से काबा तक परस्पर प्रेम व सौहार्द का संदेश दिया है।

*खुशनुमा माहौल में मनाया गया रंगोंत्सव*
✨शिव की नगरी काशी में मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर काबा तक सौहार्द का सन्देश दे दिया है। धर्म की नगरी काशी में मुस्लिम महिलाओं ने हिन्दू बहनों के साथ गुलाब की पंखुड़ियों, गुलाल और फूलों से जमकर होली खेली। ढ़ोलक-मजीरे पर सभी ने मिलकर होली के गीत गए। बेहद ही खुशनुमा व सौहार्द पूर्ण वातावरण में सभी ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।भगवान श्री राम के दरबार के बड़े-बड़े चित्रों के समक्ष होली खेलते हुए मुस्लिम महिलाओ ने कहा कि यह कहना गलत है कि मुस्लिम रंगों से दूर रहता है, बुनकर की कारीगरी की आत्मा-हृदय रंग ही रहा है।

*खून की होली जहन्नुम पहुंचाएगी और रंग की होली जन्नत*
✨सामाजिक संस्था विशाल भारत संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस रंगोत्सव के अवसर पर संस्था के डायरेक्टर डॉ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि एक ओर मिडिल ईस्ट में लोग खून की होली खेल रहे हैं। एक देश दूसरे देश के खून का प्यासा बना है। लोग एक दूसरे का गला काट रहे हैं। वहीं, काशी में लोग एकदूसरे को गुलाल लगाकर एकदूसरे पर फूलों की वर्षा कर रहे हैं। यही प्यार सिखाता है कि हम अगर रंग की होली खेलेंगे तो जन्नत जाएंगे और खून की होली हमें जहन्नुम पहुंचाएगी।

*क्या कहती हैं मुस्लिम महिला नजमा परवीन
✨काशी हमेशा से गंगा जमुनी संस्कृति की मिसाल कायम करने वाला रहा है। हम सब चाहे हिंदू हो या मुसलमान, खून के रंग से सब एक हैं और इसलिए हम सब यहां काशी से विश्व को यह एकता का पैगाम दे रहे हैं कि आपस मे एकजुट रहो, बंटो नहीं, क्योंकि हम सभी एक है। यहां हिंदू और मुस्लिम सभी महिलाएं जात पात व धर्म से ऊपर उठकर एकसाथ रंगोत्सव का त्यौहार मना रही हैं।

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