गुवाहाटी जिला एवं सत्र न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश: श्यामकनु महंत का बैंक खाता डी-फ्रीज़ करने का निर्देश
असम के सांस्कृतिक प्रतीक जुबीन गर्ग की मृत्यु से जुड़े चर्चित मामले में गुवाहाटी के जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए श्यामकनु महंत के बैंक खाते को डी-फ्रीज़ (अनफ्रीज़) करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब जांच की प्रक्रिया और उसकी वैधानिकता को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे थे।न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच अधिकारियों द्वारा खाते को फ्रीज़ करने की कार्रवाई में प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ पाई गईं। विशेष रूप से अदालत ने उल्लेख किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया। यह धारा ऐसे मामलों में संपत्ति या बैंक खाते को जब्त या फ्रीज़ करने से संबंधित आवश्यक कानूनी सुरक्षा और प्रक्रिया निर्धारित करती है।अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि जो कमियाँ रेखांकित की गई हैं, वे केवल तकनीकी प्रकृति की हैं और जांच के मूल उद्देश्य को प्रभावित नहीं करतीं। हालांकि, न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून की प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की कार्रवाई विधिसम्मत तरीके से ही की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जांच एजेंसियां निर्धारित कानूनी प्रावधानों का सही ढंग से अनुपालन करती हैं, तो वैधानिक कार्रवाई करने का मार्ग खुला रहेगा। इस आदेश के बाद मृतक के परिवार तथा आम नागरिकों की ओर से विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कई लोगों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विधिक शुचिता की जीत बताया है, जबकि कुछ ने उच्च-प्रोफ़ाइल मामलों में जांच एजेंसियों की सतर्कता और जिम्मेदारी पर प्रश्न उठाए हैं। यह फैसला एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि संवेदनशील और चर्चित आपराधिक मामलों में भी जांच एजेंसियों को विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है। न्यायालय का यह आदेश न केवल इस विशेष मामले के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की आपराधिक जांचों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश देता है कि विधिक प्रक्रिया से किसी प्रकार का विचलन न्यायिक परीक्षण में टिक नहीं पाएगा।