मरहुम शेख सफीर के लाडले बेटे शेख तौहिद ने रखा अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा.
मरहुम शेख सफीर के लाडले बेटे शेख तौहीद ने इस तपती हुई धुप में अपने रब को राज़ी करने के लिए रखा.
शेख़ तौहीद ने माहे रमजान २०२६ मे अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा अपने नाना के घर बालापुर में बड़े धूमधाम से रखा सभी बड़े बुजुर्गों ने दुआओ ने नवाज़ा और तौहीद के अम्मी और नाना जान को मुबारक बाद पेश किए.