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मरहूम शेख़ सफ़ीर के फरज़ंद शेख़ सोरिम ने रखा अपनी ज़िदगी का पहला रोज़ा.

मरहूम शेख़ सफ़ीर के लाडले बेटे शेख़ सॉरीम ने अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा इस तपती हुई गर्मी में भूख और प्यास की शिद्दत को महसूस करते हुए अपने अल्लाह को राज़ी करने के लिए रखा.
शेख़ सौरिम ने बालापुर स्थित अपने नाना के निवास मोमिन पुरा में रखा जिसमे बालापुर और अकोला के सभी बड़े बुजुर्गों ने सौरिम को बहोत सारी दुआ ए दी और उसके अम्मी और नाना जान को मुबारक बाद पेश की.

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