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ढकरानी पावर हाउस और शक्ति नहर की सुरक्षा दांव पर? रसूख के दम पर बफर ज़ोन के नियमों को ठेंगा!

विकासनगर (इंद्रपाल सिंह): देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र अंतर्गत ढकरानी गांव में उत्तराखंड जल विद्युत निगम (UJVNL) के ढकरानी पावर हाउस, शक्ति नहर और सोलर प्लांट के अति-संवेदनशील क्षेत्र के निकट रेत भंडारण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहाँ 500 मीटर के अनिवार्य 'बफर ज़ोन' के नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, विकासनगर क्षेत्र में संचालित कुछ स्टोन क्रेशरों और भंडारण स्थलों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि कुछ संचालक अपने उच्च स्तरीय राजनीतिक संपर्कों और शासन-प्रशासन में पैठ का हवाला देकर कार्रवाई न होने का दावा कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि रसूखदार संचालकों के तार राजधानी के रसूखदार गलियारों तक जुड़े होने के दावे किए जा रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मामले में चुप्पी साधे हुए है।

नियमों के अनुसार, संवेदनशील जल संरचनाओं और पावर प्रोजेक्ट्स के पास बफर ज़ोन अनिवार्य है। लेकिन यहाँ पावर हाउस के मुख्य ग्रिड और सोलर प्लांट से महज कुछ मीटर की दूरी पर भारी मशीनों और डंपरों का जमावड़ा लगा रहता है। रेत की धूल से जहाँ सोलर पैनलों को नुकसान पहुँच रहा है, वहीं भारी वाहनों से विभाग की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जागरूक नागरिकों और किसानों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी रसूखदार व्यक्ति के निजी स्वार्थ के लिए 'नेशनल एसेट' (राष्ट्रीय संपत्ति) की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। लोगों ने मांग की है कि राजस्व, खनन और विद्युत विभाग की संयुक्त टीम बनाकर मौके की पैमाइश कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त खनन नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।

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