एक बहुत संवेदनशील और दर्दनाक मामला
यह पोस्ट पढ़कर बहुत दुख और गंभीर चिंता होती है। जो व्यक्तिगत अनुभव साझा किया है हरियाणा पुलिस द्वारा कई बार एनकाउंटर की कोशिश से बचना, और 2001 में थाना धारीवाल, गुरदासपुर में हरियाणा स्टेट की पुलिस के विरुद दर्ज FIR नंबर 144 (दिनांक 12/10/2001) यह एक बहुत संवेदनशील और दर्दनाक मामला लगता है। 25 साल पुराना होने के बावजूद, ऐसे केस में न्याय की लड़ाई जारी रखना और आवाज उठाना साहस की बात है। आम लोगों ने सही कहा कि 1990-2000 के दशक में पंजाब-हरियाणा बॉर्डर एरिया में फेक एनकाउंटर और क्रॉस-स्टेट पुलिस एक्शन के कई मामले सामने आए थे। कुछ मामलों में CBI जांच हुई, हाई कोर्ट में सुनवाई चली, और कुछ पुलिस अधिकारियों को सजा भी मिली (जैसे कुछ रिटायर्ड अधिकारियों को उम्रकैद)। लेकिन कई केस, खासकर पुराने और संवेदनशील वाले, डिजिटाइज्ड नहीं हैं या पब्लिक डोमेन में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। FIR रिकॉर्ड्स अक्सर लोकल स्तर पर रहते हैं, और ऐसे मामलों में हाई कोर्ट या CBI तक पहुंच बनाना मुश्किल होता है, खासकर अगर फाइनेंशियल स्थिति कमजोर हो। मेरे द्वारा उठाई गई आवाज बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई परिवार ऐसे ही दर्द से गुजरे हैं अवैध हिरासत, फेक एनकाउंटर, गायब होने के मामले। मानवाधिकार संगठन जैसे Ensaaf ने भी पंजाब में 1980-90 के दशक के ऐसे हजारों मामलों को डॉक्यूमेंट किया है, जहां पुलिस द्वारा जबरन गायब किए गए या एनकाउंटर में मारे गए लोगों के परिवार आज भी न्याय की उम्मीद में हैं। मेरे इस केस के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है—पुराने FIR होने और डिजिटाइजेशन की कमी के कारण। लेकिन मैंने जो डिटेल दी है (FIR नंबर, तारीख, थाना), वह मजबूत आधार है। यह पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में पेंडिंग है आप नियमित रूप से केस स्टेटस चेक कर सकते हैं (हाई कोर्ट की वेबसाइट पर केस नंबर या पार्टी नेम से)। वाहेगुरु जी हमारी हमारे परवार की रक्षा करें, हिम्मत दें, और सच्चाई को जल्द जीत दिलाएं। न्याय की राह लंबी हो सकती है, लेकिन मेरे जैसे लोग जो लगातार आवाज उठाते हैं, वे बदलाव लाते हैं। यह काम को बहादुरी और जज्बा प्रेरणादायक है। सच्चाई की जीत होती है।
🙏 हरबंस सिंह एडवाइजर,🙏🚩🇾🇪
शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन, पंजाब।
मोबाइल +918054400953
ईमेल harbanssingh396@gmail.com