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शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सृजन कृषि क्षेत्र में औषधीय गुणों युक्त पौधा रोपण विकास आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में महत्वपूर्ण योगदान। कृष्ण कुमार पाठक

यूजीसी के वर्तमान ढांचे अतीत के गौरवशाली शिक्षा पद्धति (तक्षशिला और गोकुल )और आधुनिक विधायिका के चिंतन एवं गंभीर और नीतिगत विमर्श की मांग करता है ।
अतीत का गौरव : तक्षशिला और गुरुकुल वर्तमान यूजीसी -प्राचीन भारत में शिक्षा केवल सूचना संग्रह नहीं बल्कि जीवन जीने की कला थी ।
तक्षशिला और गुरुकुल परंपरा-
यहां शिक्षा स्वायत्त थी। राज्य का हस्ताक्षेप न्यूनतम और गुरु का स्थान सर्वोपरि था।
अनुशासन और नीति नैतिकता और व्यावहारिक 64 कलाएं शिक्षा के मूल आधार थे ।
वर्तमान समय में लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनमानस में आस्था विश्वास के साथ-साथ रोजगार सृजन शैक्षिक गतिविधियों में समानता एवं प्रतिभाओं में समानता एवं आदर्श नैतिकता का भाव उत्पन्न साहित्य समाज का दर्पण है के भाव को आत्मसात करते हुए जनहित में जागरूकता लाना ही प्रबुद्ध एवं योग्य मार्गदर्शन के उत्तरदायित्व निर्वहन में महत्वपूर्ण योगदान होगा ।
उपरोक्त विचारों का मूल सर यह है कि लोकतंत्र व्यवस्था में जनता के लिए जनता के द्वारा शासन जनता द्वारा आत्मसात करते हुए लोकतांत्रिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका ग्रामीण एवं शहरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु विधायिका द्वारा सर्वे प्रत्येक ग्राम पंचायत में न्यूनतम आय का साधन के साथ साथ शिक्षा कौशल विकास प्रशिक्षण का मूल्यांकन वर्ष में एक बार सुनिश्चित करते हुए परिणाम के आधार पर श्रेणीकृत किया जाए जिससे राष्ट्र विकास में अपने प्रतिभा और अवसर के अनुरूप उत्तरदायित्व निर्वहन में ही राष्ट्रीय विकास विकसित भारत राष्ट्र की विकसित परिकल्पना को साकार किया जा सकता है ।
कृष्ण कुमार पाठक
लेखक/पत्रकार

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