समनापुर शासकीय महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
शासकीय महाविद्यालय समनापुर की स्थापना 2018 के बाद पहली बार प्राचार्य श्री चैन सिंह परस्ते के संरक्षण में हिंदी विभाग द्वारा 25 एवं 26 फरवरी 2026 को विषय 'जनजातीय जीवन में राष्ट्रीय चेतना के विविध स्वरूप पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। इस सेमिनार का उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय योगदान तथा उनकी जीवन दृष्टि को समझना और उसे व्यापक स्तर पर प्रसारित करना था।
मुख्य अतिथि डॉ. विजय चौरसिया, एवं मंचासीन समस्त पदाधिकारियों के द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस राष्ट्रीय सेमिनार में छत्तीसगढ़ राज्य से आए मुख्य वक्ता डॉ. फूलदास महंत, डॉ. बेला महंत, और अनूपपुर से डॉ.डी.पी.शामें, डिंडौरी से डॉ.पी.सी. उईके, डॉ. ओंकार चंदेल (सेवानिवृत) ने अपने उद्बोधन में जनजातीय समाज के त्याग, परंपराओं एवं राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला तथा इसे राष्ट्रीय चेतना का सशक्त आधार बताया।
विशिष्ट अतिथि पद्मश्री अर्जुन धुर्वे, श्रीमती भागवती राठुड़िया (लोकगीतकार), ने अपने गीत के माध्यम से, और श्री राजा मशराम ने आदिवासी आभूषणों की प्रदर्शनी लगाकर तथा छात्राओ ने मनमोहक आदिवासी नृत्य के माध्यम से जनजातियों की परंपराओं तथा कला व संस्कृति से अवगत कराया। शोधार्थियों के द्वारा अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए गए जिसमें जनजातीय जीवन की सांस्कृतिक समृद्धि, प्रकृति के साथ उनके सहजीवी संबंध तथा राष्ट्र की एकता एवं अखंडता में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सविता मरावी द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के सेमिनार ज्ञानवर्धन एवं राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त स्टॉफ, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।