जन्मदिन पर: Shyam Lal Nishad गुरुजी के नाम
28 फ़रवरी सिर्फ़ तारीख नहीं, उस लड़के की याद है जो कादीपुर के छोटे से गांव से गलियों से निकलकर संघर्ष का रास्ता चुना और मोस्ट की निःशुल्क पाठशालाएँ खोल बैठा। विरोध मिला गाँव की फुसफुसाहट से लेकर दफ़्तरी नोटिस तक पर क्लास का ब्लैकबोर्ड कभी खाली नहीं छोड़ा।
निलंबन की ख़बर आई, तो भी आपने माइक पकड़कर वही कहा जो सालों से कहते आए: “पिछड़े को आवाज़ दो, बाकी इतिहास खुद लिखेगा।” यही जिद आपको गुरुजी बनाती है।
जन्मदिन मुबारक हो। आपकी लड़ाई पढ़ाई-लिखाई में बदलती रहे, और आपके छात्रों की कॉपियों में आपके हक-अधिकार वाले वाक्य हर साल नए अध्याय बनें।💐👌⭐🙏