बहुजन छात्रों के सम्मान ओर सुरक्षा के लिए यूजीसी ईक्टिविटी रेगुलेशन एक्ट 2026 के समर्थन में हुंकार
*बहुजन छात्रों के सम्मान और सुरक्षा के लिए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026 के समर्थन में हुंकार: बिरसा फुले अंबेडकर संयुक्त मोर्चा (विधानसभा नागदा खाचरोद) ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन*
*उज्जैन/गिरधारी लाल गेहलोत जन जन आवाज की खास खबर*
नागदा/खाचरौद: उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और उनके साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए 'बिरसा फुले अंबेडकर संयुक्त मोर्चा' (विधानसभा नागदा-खाचरौद) ने एक निर्णायक कदम उठाया है। मोर्चे के बैनर तले बड़ी संख्या में बहुजन समाज के युवाओं और प्रबुद्धजनों ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026 के पूर्ण समर्थन में भारत के प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) नागदा को सौंपा।
संवैधानिक "कवच बनेगा एक्ट"
ज्ञापन सौंपते समय मोर्चे के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह एक्ट भारतीय संविधान के उन मौलिक अधिकारों का विस्तार है, जो दशकों से केवल कागजों तक सीमित थे।
अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार): के तहत अब विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी छात्र के साथ नियमों में भेदभाव नहीं कर सकेगा।
अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध): का हवाला देते हुए कहा गया कि जाति के आधार पर कैंपस में छात्रों को मानसिक या शैक्षणिक रूप से प्रताड़ित करना अब कानूनन अपराध होगा।
अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत): को आधार बनाकर मोर्चे ने मांग की है कि कैंपस के भीतर पनप रही 'आधुनिक छुआछूत' और 'संस्थागत उत्पीड़न' को इस रेगुलेशन के माध्यम से समाप्त किया जाए।
रोहित वेमुला और पायल तड़वी का जिक्र
संयुक्त मोर्चे ने चेतावनी दी कि देश ने रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी जैसे होनहारों को खोया है। अब और कोई 'संस्थागत हत्या' (Institutional Murder) स्वीकार नहीं की जाएगी। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026 बहुजन छात्रों के लिए एक सुरक्षा कवच है, जिसे नागदा-खाचरौद के बहुजन समाज का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
प्रमुख मांगें:
समस्त शिक्षण संस्थानों में 'एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल' को अनिवार्य और जवाबदेह बनाया जाए।
जातिगत टिप्पणी या प्रताड़ना करने वाले अधिकारियों/प्रोफेसरों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।
उच्च शिक्षा में बहुजन समाज के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति और शोध (Research) में आ रही बाधाओं को इस एक्ट के जरिए दूर किया जाए।
उपस्थिति:
ज्ञापन सौंपने के दौरान बिरसा फुले अंबेडकर संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में युवा छात्र उपस्थित रहे। मोर्चे ने संकल्प लिया कि यदि इस संवैधानिक एक्ट के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बरती गई, तो गांव-गांव और तहसील स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इस मौके पर भीमआर्मी, जयस, बागरी युवा संघ,कबीर अनुयायि, रविदास अनुयायि,और जीवन डाबी, जीवन सोलंकी, राकेश राठौर बेहलोला,श्रवण धानक,पप्पू मेव,ओंकारलाल खाचरोटिया, वीरेंद्र चौहान, राधेश्याम रायकवार, राहुल चौहान,गोपाल गुजरवाडिया, अशोक चौहान, गोविंद डायना, सोलंकी राहुल परमार, मोहनलाल बौद्ध, संतोष यादव सुरेश सोलंकी सुरेश चौहान,रानी शेख,दिनेश चौहान, रॉकी, दशरथ पंवार और भी सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे,