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पार्ट–2 (विशेष रिपोर्ट) कुछ ही महीनों में टूटा डेम! ठेकेदार से लेकर इंजीनियर और सहायक यंत्री तक सवालों के घेरे में

पार्ट–2 (विशेष रिपोर्ट)
कुछ ही महीनों में टूटा डेम!
ठेकेदार से लेकर इंजीनियर और सहायक यंत्री तक सवालों के घेरे में
धरमपुरी/धार।
धरमपुरी तहसील के ग्राम पंचायत निमोला अंतर्गत ग्राम गुलाटी में नाले पर बनाया गया डेम अब लापरवाही और मिलीभगत की कहानी बयां करता नजर आ रहा है। जिस निर्माण को जल संरक्षण की बड़ी उपलब्धि बताया गया था, वह कुछ ही महीनों में दरारों और टूट-फूट में बदल गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई। सवाल यह उठ रहा है कि जब काम चल रहा था, तब निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? क्या ठेकेदार ने घटिया सामग्री का उपयोग किया? क्या इंजीनियर और सहायक यंत्री ने समय पर निरीक्षण नहीं किया? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?
जिम्मेदार कौन?
किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में गुणवत्ता की जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदार की नहीं होती। कार्य का तकनीकी परीक्षण और माप पुस्तिका का सत्यापन संबंधित इंजीनियर और सहायक यंत्री द्वारा किया जाता है। यदि डेम कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गया, तो यह स्पष्ट संकेत है कि या तो निर्माण में गंभीर तकनीकी त्रुटि हुई है या फिर निगरानी पूरी तरह कागजों तक सीमित रही।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई तो ठेकेदार के साथ-साथ जिम्मेदार तकनीकी अधिकारियों की भूमिका भी सामने आएगी।
वर्जन
अभिषेक चौधरी (जिला पंचायत सीईओ, धार) ने दूरभाष पर बताया कि वे स्वयं मौके पर पहुंचे थे और प्रारंभिक निरीक्षण में कमियां पाई गई हैं। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
अब असली परीक्षा प्रशासन की
अब देखना यह होगा कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या वास्तव में ठेकेदार, इंजीनियर और सहायक यंत्री सहित जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होती है। क्या शासकीय राशि की वसूली की जाएगी? क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाला जाए और डेम का पुनर्निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाए।
जनता पूछ रही है — क्या इस बार सच में जवाबदेही तय होगी, या फिर मामला फाइलों में दब जाएगा?

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