*मिलावटखोरी पर बड़ा प्रहार, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल?*
*मिलावटखोरी पर बड़ा प्रहार, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल?*
Gulshan salmani 9548515007
लोकतंत्र की आवाज़
सहारनपुर: आगामी त्योहारों के मद्देनजर मिलावटखोरों के विरुद्ध अभियान छेड़ते हुए मंडलीय खाद्य सुरक्षा विभाग ने थाना मंडी क्षेत्र की कमेला कॉलोनी में एक अवैध डेयरी फैक्ट्री पर बड़ी छापेमारी की है। संयुक्त पुलिस बल के साथ हुई इस कार्रवाई में विभाग को फैक्ट्री के भीतर बेहद वीभत्स और अनहाइजीनिक स्थितियां मिलीं, जहाँ लगभग 1000 लीटर दूध खुले बर्तनों में मच्छरों और मक्खियों के बीच रखा था और करीब 5 कुंतल पनीर सीधे गंदे फर्श पर जमाया जा रहा था। यह फैक्ट्री पूर्व में मीट गोदाम रहे परिसर में संचालित हो रही थी, जिससे खाद्य सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी उजागर हुई है!
*अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल*
इस पूरी कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। नियमानुसार किसी भी खाद्य इकाई को लाइसेंस जारी करने से पहले परिसर का भौतिक निरीक्षण किया जाना अति आवश्यक है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि एक ऐसा स्थान जहां पहले मीट का कारोबार होता हो और चारों तरफ गंदगी का अंबार हो, वहां दूध और पनीर जैसे संवेदनशील पदार्थों के उत्पादन की अनुमति या संचालन कैसे संभव हुआ? स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि अधिकारियों ने लाइसेंस जारी करने के दौरान मौके पर गंभीरता से निरीक्षण किया होता, तो इस तरह की अवैध और अस्वास्थ्यकर फैक्ट्री कभी फल-फूल नहीं पाती। विभाग की यह ढिलाई अब सवालों के घेरे में है!
*पुराना खिलाड़ी है आरोपी संचालक?*
सूत्रों के अनुसार मुख्य संचालक फरमान पहले भी रामपुर मनिहारान में नकली पनीर बनाने के आरोप में पकड़ा जा चुका है, लेकिन वह फिर से सहारनपुर में यह धंधा शुरू करने में कामयाब रहा। टीम के पहुंचते ही फरमान मौके से फरार हो गया। विभाग ने दूध और पनीर के नमूने लेकर राजकीय प्रयोगशाला भेज दिए हैं और संचालक व उसके कथित साझेदार कादिर की तलाश तेज कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।