सत्य ज्ञान सरोवर
*रामायण की प्रत्येक चौपाई को हनुमान जी सुनते हैं, किंतु सुंदरकांड को क्यों नहीं सुनते*। स्वामी जी कहते हैं हनुमान जी रामायण के रसिया है, जहां भी रामायण हो वहा हनुमान जी पहुंच ही जाते हैं, रामायण की एक-एक चौपाई को सुनते हैं, यहां तक की रामायण की कुछ चौपाइयां हनुमान जी के लिए मंत्र का काम भी करती हैं, किंतु आश्चर्य रामायण के सबसे प्रसिद्ध कांड सुंदरकांड को हनुमान जी सुनते ही नहीं, सुंदरकांड को श्री सीताराम जी सुनते हैं, पूर्णानंद जी महाराज कहते हैं, कि संपूर्ण सुंदरकांड कांड में हनुमान जी की प्रशंसा वीर रस, भक्ति रस का समायोजन है, किसी व्यक्ति को उसकी ही प्रशंसा उसको उसकी ही वीर रस की गाथा सुनाओ तो उसमें अहंकार आ जाता है, जिस प्रकार अपने बच्चों की प्रशंसा को सुनकर माता पिता अति प्रसन्न होते हैं, उसी प्रकार सुंदरकांड को सुनने स्वयं सीताराम जी आते हैं, और राम सीता जी को देखकर हनुमान जी सुंदरकांड को छोड़ उनकी भक्ति में मगन हो जाते हैं,ऑर श्रीराम माता के साथ संपूर्ण सुंदरकांड सुनते हैं, व प्रसन्न होकर व्यक्ति को मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं, इसीलिए सुंदरकांड की सभी काडो में में सबसे अधिक महत्ता है *अवतोष शर्मा आध्यात्मिक लेखक*